
Gujarat: RSS की महिला कार्यकर्ताओं ने किया शवों का अंतिम संस्कार, चिता को दी अग्नि
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RSS Female Workers Performed Last Rites: शवों को पहले भुज के श्मसान घाट ले जाया गया था लेकिन वहां अंतिम संस्कार के लिए जगह नहीं थी. इसके बाद शवों को सुख्पर के श्मशान ले जाया गया. जहां आरएसएस की महिला कार्यकर्ताओं ने सनातन वैदिक परंपरा से शवों का अंतिम संस्कार किया.
कच्छ: गुजरात के कच्छ जिले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) की महिला कार्यकर्ताओं ने हिंदू परंपरा के अनुसार शवों का अंतिम संस्कार किया. इसके लिए महिला कार्यकर्ताओं की हर तरफ तारीफ की जा रही है. बता दें कि कच्छ के सुख्पर में शवों का अंतिम संस्कार आरएसएस की महिला कार्यकर्ता हिना रामजी वेलानी ने किया. अंतिम संस्कार करते समय उन्होंने पीपीई किट पहने रखी. इसमें अन्य कार्यकर्ताओं ने भी हिस्सा लिया.
India 6th Generation Fighter jet: फ्रांस, स्पेन और जर्मनी का संयुक्त रूप से चल रहा 6वीं पीढ़ी का फाइटर जेट आपसी मदभेदों की वजह से बंद होने के कगार पर पहुंच गया है. यूरोपीय देशों का विवाद भारत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. क्योंकि जर्मनी ने भारत को 6वीं पीढ़ी के फाइटर जेट प्रोजेक्ट का ऑफर दिया है.

Ice Breaker missile: भारतीय नौसेना अब अपने बेड़े को और भी ज्यादा खतरनाक बनाने के लिए एक ऐसे मिसाइल सिस्टम पर विचार कर रही है, जो समंदर के बीचों-बीच दुश्मन के होश उड़ा देगा. खबर आ रही है कि भारतीय नौसेना अपने MH-60R सीहॉक हेलीकॉप्टरों को इजरायल की आधुनिक 'आइस ब्रेकर' मिसाइल से लैस करने की योजना बना रही है. खास बात यह है कि भारतीय वायुसेना पहले ही इस मिसाइल को अपनी ताकत में शामिल करने की मंजूरी दे चुकी है.

Line Replaceable Units: RVAS ने भारत के स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. कंपनी अब तेजस Mk-2 के लिए एक महत्वपूर्ण Line Replaceable Unit के विकास में भागीदार बन गई है. तेजस Mk-2 को भारतीय वायुसेना के भविष्य के बेड़े की रीढ़ माना जा रहा है. तेजस Mk-2 एक मीडियम-वेट, सिंगल इंजन, मल्टी-रोल फाइटर जेट होगा. इसमें नया एयरफ्रेम, ज्यादा ताकतवर इंजन, आधुनिक एवियोनिक्स, स्वदेशी AESA रडार और ज्यादा हथियार ले जाने की क्षमता होगी.

Pakistani Leader Chief Guest in 1955 republic day: यह किस्सा है साल 1955 का. उस समय भारत ने पाकिस्तान के तत्कालीन गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था. उस दौर में भारत अपनी लोकतांत्रिक संस्थाओं और परंपराओं को आकार दे रहा था. मलिक गुलाम मोहम्मद का भारत से पुराना जुड़ाव भी रहा था. उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी.









