
Gujarat: दुधमुहे बच्चे को गौशाला में छोड़ गया शख्स, केस क्राइम ब्रांच के हवाले
Zee News
रिपोर्ट के मुताबिक, गौशाला के बाहर जब लोगों ने बच्चे के रोने की आवाज सुनी तो भीड़ जुटने लगी. मकामी पार्षद दीप्ति पटेल (Dipti Patel) ने खुद बच्चे को गोद में उठाकर उसकी देखभाल की.
गांधीनगर: गुजरात (Gujarat) के गांधीनगर (Gandhinagar) में एक मासूम बच्चा जब लावारिस हाल में मिला जिसके बाद इलाके में हड़कंप मच गया. बताया जा रहा है कि ये बच्चा करीब 8 महीने का है. खबरों के मुताबिक शुक्रवार रात 9 बजे एक नामालूम शख्स इस बच्चे को स्वामीनारायण मंदिर की गौशाला के बाहर छोड़ गया है.
क्राइम ब्रांच को सौंपा गया केस इस घटनाक्रम से जुड़ी सीसीटीवी फुटेज पुलिस को दी गई है. करीब 18 घंटे की छानबीन के बाद भी अब तक इस बच्चे के परिवार का कोई सुराग नही मिल पाया है. गुजरात पुलिस (Police) का यह भी मानना है कि यह बच्चा गुजरात के अलावा किसी बाहरी स्टेट का भी हो सकता है. हमने बच्चे को इसके परिवार से मिलाने की मुहिम छेड़ी हैं. अगर सभी नेटवर्क में यह खबर चलती है तो एक मासूम को अपने परिवार तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है.

Indian France Rafale deal: फ्रांस से खरीदे जाने वाले 114 राफेल की मंजूरी डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड से मिल गई है. जिससे यह डील अंतिम चरण में पहुंच गई है. इसके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली DAC की बैठक में डील पर चर्चा के बाद मुहर लगाई जाएगी. अंतिम हस्तारक्षर इस डील पर पीएम मोदी करेंगे.

India Nuclear Powered Submarine: साल 2040 तक भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा न्यूक्लियर पावर्ड पनडुब्बी ऑपरेटर बन सकता है. इस दौरान भारत ब्रिटेन को पीछे छोड़ देगा. अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथा देश बन जाएगा. दुनिया में सबसे ज्यादा न्यूक्लियर सबमरीन अमेरिका के पास हैं. इनकी संख्या 60 से 70 के बीच है.

DRDO hypersonic missile: भारतीय नौसेना एक बेहद लंबी दूरी वाली, हवा से लॉन्च होने वाली 'एंटी-शिप बैलिस्टिक' मिसाइल हासिल करने की योजना बना रही है. यह मिसाइल 1,000 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम होगी. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि हमारे लड़ाकू विमान दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम की रेंज में आए बिना ही उनके जहाजों को समंदर की गहराइयों में भेज सकेंगे.

30MM Naval Gun Indian Navy: यह गन सिस्टम भारत फोर्ज के आर्टिलरी सेक्टर में अनुभव पर आधारित है. कंपनी पहले ही 30×173 मिमी NATO स्टैंडर्ड कैलिबर पर आधारित मॉड्यूलर टर्रेट्स विकसित कर चुकी है. इनका इस्तेमाल इंफैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स में होता है. यही कैलिबर समुद्री नजदीकी लड़ाई (Close-Range Engagement) के लिए भी प्रभावी माना जाता है.









