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Explained: क्या है COD Scam? हैकर्स का वो खौफनाक जाल, जिसमें फंस रहा है पूरा परिवार
Zee News
Cash on Delivery Scam तेजी से फैल रहा है. इसमें आपके घर या ऑफिस पर एक पार्सल आता है, जिसे आपने ऑर्डर नहीं किया होता. लेकिन कूरियर वाला कहता है कि “COD है, पेमेंट कर दीजिए.” कई लोग सोचते हैं कि शायद घर में किसी और ने मंगाया होगा या ऑफिस में किसी कलीग ने ऑर्डर किया होगा.
आजकल एक नया फ्रॉड तेजी से फैल रहा है, जिसे Cash on Delivery यानी COD स्कैम कहा जा रहा है. इसमें आपके घर या ऑफिस पर एक पार्सल आता है, जिसे आपने ऑर्डर नहीं किया होता. लेकिन कूरियर वाला कहता है कि “COD है, पेमेंट कर दीजिए.” कई लोग सोचते हैं कि शायद घर में किसी और ने मंगाया होगा या ऑफिस में किसी कलीग ने ऑर्डर किया होगा. इसी कन्फ्यूजन में वे पैसे दे देते हैं. बाद में जब बॉक्स खुलता है, तो उसमें पत्थर, कागज या बेहद सस्ती चीज निकलती है. तब तक बहुत देर हो चुकी होती है.
स्कैमर्स को आपका पता कैसे मिलता है? आप सोच रहे होंगे कि बिना ऑर्डर किए आपका नाम और पता किसी के पास कैसे पहुंच गया? अक्सर यह जानकारी डेटा लीक, ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स के हैक, पब्लिक लिस्टिंग या लीक हुए डेटाबेस से मिलती है. कई बार छोटे सेलर्स के अकाउंट हैक हो जाते हैं और वहीं से ग्राहकों की डिटेल्स चुरा ली जाती हैं. स्कैमर्स इसी डेटा का इस्तेमाल करके आपके नाम से फर्जी पार्सल भेज देते हैं.
COD स्कैम काम कैसे करता है? पूरा खेल बहुत सिंपल लेकिन स्मार्ट तरीके से खेला जाता है. सबसे पहले ठग आपके नाम और पते पर एक पार्सल बुक कर देते हैं. उसमें एक तय रकम लिखी होती है, जिसे डिलीवरी के समय कलेक्ट करना होता है. जब कूरियर एजेंट आपके दरवाजे पर आता है, तो वह सिर्फ सिस्टम में दिख रही जानकारी के आधार पर पैसे मांगता है. उसे यह नहीं पता होता कि बॉक्स में क्या है. क्योंकि COD एक आम पेमेंट तरीका है, इसलिए लोग बिना ज्यादा सोचे-समझे पैसे दे देते हैं. एक बार पेमेंट हो जाने के बाद कूरियर कंपनी अपनी नियमित प्रक्रिया के तहत पैसे भेजने वाले के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर देती है. कुछ मामलों में ठग पहले से कॉल या मैसेज करके बताते हैं कि “आपका पार्सल आ रहा है”, ताकि आपको लगे कि सब नॉर्मल है. एक और ट्रिक में कहा जाता है कि “विदेश से गिफ्ट आया है, सिर्फ डिलीवरी चार्ज देना है.” लोग उत्सुकता में पेमेंट कर देते हैं.
COD स्कैम क्यों खतरनाक है? इस स्कैम की खास बात यह है कि इसमें डिजिटल पेमेंट की तरह चार्जबैक या फ्रॉड मॉनिटरिंग नहीं होती. पेमेंट आपके दरवाजे पर नकद या तुरंत डिजिटल ट्रांसफर से हो जाता है. दरवाजे पर खड़े कूरियर के सामने लोग जल्दी फैसला लेते हैं. एक तरह का सोशल प्रेशर भी होता है कि “इतना सा अमाउंट है, दे देते हैं.” इसी जल्दबाजी और भरोसे का फायदा उठाकर ठग पैसा निकाल लेते हैं.
