
DU में दाखिले के लिए परफेक्ट स्कोर बना मुसीबत, 20 सीटों के लिए 100 से ज्यादा आवेदन
Zee News
Mission DU Admission 2021: दिल्ली यूनिवर्सिटी (Delhi University) में दाखिले की दौड़ जारी है. छात्र मनपंसद कॉलेज में दाखिले की कोशिश कर रहे हैं. हिंदू (Hindu) कॉलेज में बीए ऑनर्स पॉलिटिकल साइंस कोर्स, डीयू के उन टॉप 10 प्रोग्राम में रहा जिसमें सामान्य कैटेगरी के लिए पहली कटऑफ लिस्ट 100% रही.
नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University) में दाखिले से जुड़ी पहली कट ऑफ लिस्ट आने के बाद 4 अक्तूबर से शुरू हुई दाखिले की प्रक्रिया जारी है. लेकिन अपनी पसंद के कॉलेज में दाखिले के इच्छुक छात्रों के लिए परफेक्ट स्कोर (Perfect Score) सबसे बड़ी रुकावट बन गया है.
आपको जानकर हैरानी होगी कि डीयू (DU) के हिंदू कॉलेज में पॉलिटिकल साइंस बीए ऑनर्स (Political Science BA Honours) में पहले साल के लिए मात्र 20 सीटें हैं. मगर इसमें दाखिला लेने के लिए 100 परसेंट स्कोरर, बेस्ट फोर सब्जेक्ट के साथ अब तक 100 से ज्यादा आवेदन रजिस्टर हुए हैं. जिसमे एक को छोड़कर परफेक्ट स्कोर लाने वाले सभी छात्र केरल बोर्ड (Kerala Board) से हैं.

Indian France Rafale deal: फ्रांस से खरीदे जाने वाले 114 राफेल की मंजूरी डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड से मिल गई है. जिससे यह डील अंतिम चरण में पहुंच गई है. इसके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली DAC की बैठक में डील पर चर्चा के बाद मुहर लगाई जाएगी. अंतिम हस्तारक्षर इस डील पर पीएम मोदी करेंगे.

India Nuclear Powered Submarine: साल 2040 तक भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा न्यूक्लियर पावर्ड पनडुब्बी ऑपरेटर बन सकता है. इस दौरान भारत ब्रिटेन को पीछे छोड़ देगा. अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथा देश बन जाएगा. दुनिया में सबसे ज्यादा न्यूक्लियर सबमरीन अमेरिका के पास हैं. इनकी संख्या 60 से 70 के बीच है.

DRDO hypersonic missile: भारतीय नौसेना एक बेहद लंबी दूरी वाली, हवा से लॉन्च होने वाली 'एंटी-शिप बैलिस्टिक' मिसाइल हासिल करने की योजना बना रही है. यह मिसाइल 1,000 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम होगी. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि हमारे लड़ाकू विमान दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम की रेंज में आए बिना ही उनके जहाजों को समंदर की गहराइयों में भेज सकेंगे.

30MM Naval Gun Indian Navy: यह गन सिस्टम भारत फोर्ज के आर्टिलरी सेक्टर में अनुभव पर आधारित है. कंपनी पहले ही 30×173 मिमी NATO स्टैंडर्ड कैलिबर पर आधारित मॉड्यूलर टर्रेट्स विकसित कर चुकी है. इनका इस्तेमाल इंफैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स में होता है. यही कैलिबर समुद्री नजदीकी लड़ाई (Close-Range Engagement) के लिए भी प्रभावी माना जाता है.









