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DRDO का देसी 122mm रॉकेट तैयार, ग्रैड लॉन्चर BM-21 से बरसाएगा 'आग'; बस सेना की एक मुहर और दुश्मन का खेल खत्म
Zee News
DRDO 122mm indigenous rocket: DRDO ने 122mm स्वदेशी रॉकेट विकसित किया है. जिसकी तैनाती को लेकर सेना की मंजूरी का इंतजार है. यह रॉकेट रूसी लॉन्चर में आसानी से फिट हो सकता है. जो उसके पुराने वर्जन से कहीं ज्यादा एडवांस है. साथ ही, मंजूरी मिलते ही सेना को पुराने रॉकेट के लिए आयात पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
DRDO 122mm indigenous rocket: DRDO दिन-ब-दिन देसी हथियारों के डेवलपमेंट में तेजी ला रहा है. इसी कड़ी में, DRDO द्वारा विकसित किया गया स्वदेशी 122mm रॉकेट अब भारतीय सेना की अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रहा है. इस रॉकेट को खासतौर पर भारतीय सेना के पास मौजूद रूसी मूल के BM-21 'ग्रैड' मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम के लिए बनाया गया गया है. दरअसल, सेना अभी भी BM-21 के लिए रूस से पुराने गोला बारूद का आयात कर रही है. DRDO के इस रॉकेट के आने से सेना की आक्रामक क्षमता मजबूत होगी और विदेशी गोला बारूद पर उसकी निर्भरता कम होगी. ऐसे में आइए इसकी ताकत जानते हैं.

Indian Air Force refuelling aircraft: भारत के पास अभी सिर्फ 6 पुराने Il-78MKI विमान हैं जो 2003-2004 में उज्बेकिस्तान से लिए गए थे. पुर्जों की कमी की वजह से इनमें से आधे से ज्यादा विमान अक्सर मरम्मत के लिए खड़े रहते हैं. पिछले साल भारत ने अमेरिका की एक कंपनी से एक टैंकर विमान लीज पर लिया था, लेकिन उसके साथ अमेरिकी क्रू आता है, जो युद्ध के समय भारत के काम नहीं आ सकेगा. ऐसे में ये नए विमान नई ताकत बनेंगे.

Tejas-MK2 Rollout: राफेल डील के बीच इंडियन एयरफोर्स के लिए बड़ी खुशखबरी है. HAL-DRDO ने कमाल का काम करते हुए तेजस मार्क-2 को उड़ान के लिए तैयार कर दिया है. इसका इंटरनल रोलआउट पूरा हो चुका है. अब स्वदेशी मिडियम वेट फाइटर जेट ट्रायल फेज में एंट्री कर गया है. इसके बाद कुछ मंजूरियों के बाद फाइनल रोलआउट होगा, जो सार्वजनिक तौर पर किया जाएगा.

Project Kusha Air Defence System: प्रोजेक्ट कुशा पूरी तरह 'मेड इन इंडिया' होगा, जिससे युद्ध के समय हमें किसी और देश के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा. साथ ही, रूस या अमेरिका जैसे देशों को अरबों डॉलर नहीं देने पड़ेंगे. वहीं, इसमें ऐसी तकनीकें जोड़ी जा रही हैं जो आने वाले दशकों तक दुश्मन के किसी भी नए विमान को मार गिराने में सक्षम होंगी.

Astra MK-1 Missile Upgrade: DRDO इस अपग्रेड में मिसाइल के प्रोपल्शन सिस्टम, फ्लाइट प्रोफाइल और एनर्जी मैनेजमेंट को बेहतर बनाएगा. इसके साथ ही गाइडेंस सिस्टम में भी सुधार किया जाएगा. लंबी दूरी तक मिसाइल की रफ्तार और maneuverability बनी रहे. यह अपग्रेड मिसाइल के मूल डिजाइन में बड़े बदलाव के बिना किया जाएगा.

Fateh Ghadir Class Submarines: ईरान लंबे समय से अमेरिका की नौसैनिक ताकत का मुकाबला असममित रणनीति के जरिए करता रहा है. पनडुब्बियों की तैनाती इसी रणनीति का हिस्सा है. जिसके तहत ईरान सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े नौसैनिक बलों पर दबाव बना सकता है. ईरानी नौसेना के मुताबिक उनकी पनडुब्बियां अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियों पर चेतावनी देने में सक्षम हैं.








