
DNA Analysis: World Humanitarian Day पर इंसान Vs तालिबान, अफगानिस्तान में तड़पे कौम, मानवता क्यों मौन?
Zee News
मानवता के नाम पर पूरी दुनिया के देशों ने 2019 में ढाई लाख करोड़ रुपये की मदद दी थी और अमेरिका की डोनेशन का सबसे बड़ा हिस्सा अफगानिस्तान को ही जाता है, लेकिन आज भी अफगानिस्तान के 3 करोड़ 80 लाख लोग परेशानी में हैं.
नई दिल्ली: 19 अगस्त को वर्ल्ड फोटोग्राफी डे के साथ साथ विश्व मानवता दिवस (World Humanitarian Day) भी था और अक्सर मानवता के नाम पर बड़े एनजीओ, सेलिब्रिटीज और नेता सेमिनार करते हैं, कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं और तस्वीरें खिंचवाकर वहां से निकल जाते हैं. फिर इनकी PR एजेंसिया इन तस्वीरों का प्रचार करती हैं और फिर इन्हीं तस्वीरों के दम पर इन लोगों को अनुदान मिलता है और नेता सत्ता में आ जाते हैं. कुल मिलाकर मानवता के नाम पर फोटोग्राफ खिंचवाना एक उद्योग बन गया है और इसी से कई लोगों की दुकाने चलती हैं, लेकिन मानवता का भला नहीं होता. वैसे विश्व मानवता दिवस मनाने की शुरुआत वर्ष 2009 में हुई थी, लेकिन पिछले 12 वर्षों में मानवता का कोई भला नहीं हो पाया है.More Related News
