
DNA Analysis: अपनी आजादी के दिन ही फिर से गुलाम बन गया अफगानिस्तान
Zee News
लोगों ने काबुल के अब्दुल हक स्क्वायर (Abdul Haq Square) पर लगा तालिबान का इस्लामिक झंडा हटा कर, अफगानिस्तान का राष्ट्रीय ध्वज भी फहरा दिया. यही किसी भी देश के राष्ट्रीय ध्वज की असली ताकत होती है.
नई दिल्ली: 19 अगस्त को अफगानिस्तान (Afghanistan) का स्वतंत्रता दिवस है, विश्व मानवता दिवस है और वर्ल्ड फोटोग्राफी डे भी है. इन तीनों में एक गहरा रिश्ता है. अपने स्वतंत्रता दिवस पर अफगानिस्तान के लोग कट्टरपंथियों के गुलाम बन गए हैं. मानवता सिर्फ एक सुंदर शब्द बन कर रह गया है. ये एक उद्योग बन गया है, और इस समय पूरी दुनिया में मानवता की बड़ी-बड़ी दुकानें चल रही हैं, जिनका मानवता को कोई फायदा नहीं है. जबकि फोटोग्राफी यानी कैमरे का इस्तेमाल अब सिर्फ नेताओं और सेलेब्रिटी की छवि चमकाने के लिए और सेल्फी लेने के लिए होता है. आज हम आपको बताएंगे कि अफगानिस्तान में आजादी, मानवता और फोटोग्राफी कैसे कमजोर होती जा रही है, और पूरी दुनिया चुपचाप ये सबकुछ होते हुए देख रही है. अफगानिस्तान में वहां की सेना ने तो हार मान ली, लेकिन वहां के आम लोग अब भी हार मानने के लिए तैयार नहीं है. गुरुवार को अफगानिस्तान की आजादी के 102 साल पूरे होने पर काबुल (Kabul) समेत कई शहरों में लोगों ने अफगानिस्तान के राष्ट्रीय ध्वज के साथ रैलियां निकाली. इन लोगों ने काबुल के अब्दुल हक स्क्वायर (Abdul Haq Square) पर लगा तालिबान का इस्लामिक झंडा हटा कर, अफगानिस्तान का राष्ट्रीय ध्वज भी फहरा दिया.More Related News
