
Afghanistan: काबुल में फंसे लोगों को रेस्क्यू करने के लिए रोजाना दो उड़ानें संचालित करेगा भारत
Zee News
काबुल में फंसे लोगों के लिए राहत भरी खबर है. भारत सरकार ने रोजाना 2 फ्लाइट्स के काबुल एयरपोर्ट से उड़ान भरने की अनुमति दी है, ताकि लोगों को सही सलामत रेस्क्यू किया जा सके.
काबुल: तालिबान (Taliban) का कब्जा होने के बाद से ही अफगानिस्तान (Afghanistan) में हालात खराब हैं. बीतते समय के साथ वहां स्थिति भयावह होती जा रही है. इसी बीच राजधानी काबुल (Kabul) में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए भारत सरकार ने रोजाना दो उड़ानें संचालित करने का फैसला लिया है. यह अनुमति अमेरिकी और उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) बलों द्वारा दी गई है, जो वर्तमान में काबुल स्थित हामिद करजई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Hamid Karzai International Airport) के संचालन को नियंत्रित कर रहा है. अफगानिस्तान के सरकारी सूत्रों ने बताया कि काबुल एयरपोर्ट से दो भारतीय विमानों को संचालित करने की अनुमति दी जाएगी जो कि अमेरिकी सुरक्षा बलों के नियंत्रण में है.
Ice Breaker missile: भारतीय नौसेना अब अपने बेड़े को और भी ज्यादा खतरनाक बनाने के लिए एक ऐसे मिसाइल सिस्टम पर विचार कर रही है, जो समंदर के बीचों-बीच दुश्मन के होश उड़ा देगा. खबर आ रही है कि भारतीय नौसेना अपने MH-60R सीहॉक हेलीकॉप्टरों को इजरायल की आधुनिक 'आइस ब्रेकर' मिसाइल से लैस करने की योजना बना रही है. खास बात यह है कि भारतीय वायुसेना पहले ही इस मिसाइल को अपनी ताकत में शामिल करने की मंजूरी दे चुकी है.

Line Replaceable Units: RVAS ने भारत के स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. कंपनी अब तेजस Mk-2 के लिए एक महत्वपूर्ण Line Replaceable Unit के विकास में भागीदार बन गई है. तेजस Mk-2 को भारतीय वायुसेना के भविष्य के बेड़े की रीढ़ माना जा रहा है. तेजस Mk-2 एक मीडियम-वेट, सिंगल इंजन, मल्टी-रोल फाइटर जेट होगा. इसमें नया एयरफ्रेम, ज्यादा ताकतवर इंजन, आधुनिक एवियोनिक्स, स्वदेशी AESA रडार और ज्यादा हथियार ले जाने की क्षमता होगी.

Pakistani Leader Chief Guest in 1955 republic day: यह किस्सा है साल 1955 का. उस समय भारत ने पाकिस्तान के तत्कालीन गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था. उस दौर में भारत अपनी लोकतांत्रिक संस्थाओं और परंपराओं को आकार दे रहा था. मलिक गुलाम मोहम्मद का भारत से पुराना जुड़ाव भी रहा था. उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी.










