
Aditya L1 launch live updates: चांद के बाद सूरज के लिए निकलेगा भारत, कल होगी सूर्य मिशन की लॉन्चिंग
Zee News
Aditya L1 mission live updates: चंद्रयान 3 की सफल लॉन्चिंग के बाद ISRO का पहला सूर्य मिशन आदित्य L1 शनिवार यानी कल 2 सितंबर को लॉन्च किया जाएगा. इस मिशन की लॉन्चिंग सुबह 11 बजकर 50 मिनट में श्री हरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से होगी.
Aditya L1 solar mission live updates: चंद्रमा के बाद अब भारत की नजर सूर्य पर भी टिकी हुई है. बता दें कि ISRO 2 सितंबर यानी कल अपना पहला सूर्य मिशन लॉन्च करने जा रहा है. भारतीय स्पेस एजेंसी ने इस मिशन को नाम दिया है ‘आदित्य L1’. इस सोलर मिशन को लेकर पहले ही काउंटडाउन शुरू हो चुका है. आदित्य L1 के जरिए वैज्ञानिक सूर्य के बारे में जानकारी जुटाएंगे. मिशन के लिए श्री हरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से रॉकेट को प्रोजेक्ट किया जाएगा, जो करीब 15 लाख किलोमीटर की दूरी तय करेगा. बता दें कि साल 2001 में भी NASA ने अपना ये मिशन भेजा था. उस दौरान यह मिशन तो सफल रहा था, लेकिन लौटते वक्ते इसकी क्रैश लैंडिंग हो गई थी.

Indian France Rafale deal: फ्रांस से खरीदे जाने वाले 114 राफेल की मंजूरी डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड से मिल गई है. जिससे यह डील अंतिम चरण में पहुंच गई है. इसके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली DAC की बैठक में डील पर चर्चा के बाद मुहर लगाई जाएगी. अंतिम हस्तारक्षर इस डील पर पीएम मोदी करेंगे.

India Nuclear Powered Submarine: साल 2040 तक भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा न्यूक्लियर पावर्ड पनडुब्बी ऑपरेटर बन सकता है. इस दौरान भारत ब्रिटेन को पीछे छोड़ देगा. अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथा देश बन जाएगा. दुनिया में सबसे ज्यादा न्यूक्लियर सबमरीन अमेरिका के पास हैं. इनकी संख्या 60 से 70 के बीच है.

DRDO hypersonic missile: भारतीय नौसेना एक बेहद लंबी दूरी वाली, हवा से लॉन्च होने वाली 'एंटी-शिप बैलिस्टिक' मिसाइल हासिल करने की योजना बना रही है. यह मिसाइल 1,000 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम होगी. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि हमारे लड़ाकू विमान दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम की रेंज में आए बिना ही उनके जहाजों को समंदर की गहराइयों में भेज सकेंगे.

30MM Naval Gun Indian Navy: यह गन सिस्टम भारत फोर्ज के आर्टिलरी सेक्टर में अनुभव पर आधारित है. कंपनी पहले ही 30×173 मिमी NATO स्टैंडर्ड कैलिबर पर आधारित मॉड्यूलर टर्रेट्स विकसित कर चुकी है. इनका इस्तेमाल इंफैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स में होता है. यही कैलिबर समुद्री नजदीकी लड़ाई (Close-Range Engagement) के लिए भी प्रभावी माना जाता है.









