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77 साल पहले भारत में उतरा था एशिया का पहला फाइटर जेट, इंडियन एयरफोर्स के 'बेंट नेल्स' बने पहले पायलट
Zee News
Indian Air Force 2025: आज इंडियन एयरफोर्स अपना 93वां स्थापना दिवस मना रहा है. जिसके लिए हिंडन एयरबेस पर भारत के सबसे ताकतवर लड़ाकू विमानों और हथियारों का प्रदर्शन किया जा रहा है. ऐसे में जानना बेहद दिलचस्प हो जाता है कि इंडियन एयरफोर्स का पहला फाइटर जेट भारत की धरती पर कब आया और इसे उड़ाने वाले पायलट कौन थे.
India Air force first pilots: आज भारतीय वायुसेना दिवस के मौके पर हम उस ऐतिहासिक पल को याद कर रहे हैं जब देश ने पहली बार फाइटर जेट विमान का अनुभव किया था. साल 1948 की बात है. दिल्ली के पालम एयरफील्ड पर एशिया का पहला जेट लड़ाकू विमान उतरा था. इस विमान का नाम था 'डी हैविलैंड वैम्पायर'. इस जेट को उड़ाने की चुनौती इंडियन एयरफोर्स के चार बहादुर पायलटों ने स्वीकार की, जिन्हें 'बेंट नेल्स' नाम दिया गया. इन जांबाजों ने न केवल इतिहास रचा, बल्कि भारतीय वायुसेना के लिए जेट विमानों के एक नए और आधुनिक युग का दरवाजा भी खोल दिया.

Indian Air Force refuelling aircraft: भारत के पास अभी सिर्फ 6 पुराने Il-78MKI विमान हैं जो 2003-2004 में उज्बेकिस्तान से लिए गए थे. पुर्जों की कमी की वजह से इनमें से आधे से ज्यादा विमान अक्सर मरम्मत के लिए खड़े रहते हैं. पिछले साल भारत ने अमेरिका की एक कंपनी से एक टैंकर विमान लीज पर लिया था, लेकिन उसके साथ अमेरिकी क्रू आता है, जो युद्ध के समय भारत के काम नहीं आ सकेगा. ऐसे में ये नए विमान नई ताकत बनेंगे.

Tejas-MK2 Rollout: राफेल डील के बीच इंडियन एयरफोर्स के लिए बड़ी खुशखबरी है. HAL-DRDO ने कमाल का काम करते हुए तेजस मार्क-2 को उड़ान के लिए तैयार कर दिया है. इसका इंटरनल रोलआउट पूरा हो चुका है. अब स्वदेशी मिडियम वेट फाइटर जेट ट्रायल फेज में एंट्री कर गया है. इसके बाद कुछ मंजूरियों के बाद फाइनल रोलआउट होगा, जो सार्वजनिक तौर पर किया जाएगा.

Project Kusha Air Defence System: प्रोजेक्ट कुशा पूरी तरह 'मेड इन इंडिया' होगा, जिससे युद्ध के समय हमें किसी और देश के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा. साथ ही, रूस या अमेरिका जैसे देशों को अरबों डॉलर नहीं देने पड़ेंगे. वहीं, इसमें ऐसी तकनीकें जोड़ी जा रही हैं जो आने वाले दशकों तक दुश्मन के किसी भी नए विमान को मार गिराने में सक्षम होंगी.

Astra MK-1 Missile Upgrade: DRDO इस अपग्रेड में मिसाइल के प्रोपल्शन सिस्टम, फ्लाइट प्रोफाइल और एनर्जी मैनेजमेंट को बेहतर बनाएगा. इसके साथ ही गाइडेंस सिस्टम में भी सुधार किया जाएगा. लंबी दूरी तक मिसाइल की रफ्तार और maneuverability बनी रहे. यह अपग्रेड मिसाइल के मूल डिजाइन में बड़े बदलाव के बिना किया जाएगा.

Fateh Ghadir Class Submarines: ईरान लंबे समय से अमेरिका की नौसैनिक ताकत का मुकाबला असममित रणनीति के जरिए करता रहा है. पनडुब्बियों की तैनाती इसी रणनीति का हिस्सा है. जिसके तहत ईरान सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े नौसैनिक बलों पर दबाव बना सकता है. ईरानी नौसेना के मुताबिक उनकी पनडुब्बियां अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियों पर चेतावनी देने में सक्षम हैं.








