
स्वदेश दीपक: एक बहुत बड़े विस्तार में निपट अकेला…
The Wire
जन्मदिन विशेष: एक सर्जक के मन की पीड़ाएं उसकी सर्जना के लिए माध्यम बनती हैं पर स्वयं सर्जक भी स्पष्ट रूप से नहीं समझ पाते कि उनकी मानसिक व्याधियों से उनकी कला का वह रूप संभव हो सका है, या अशांत मन के विकारों ने उनकी कला को सीमित किया. स्वदेश दीपक भी अपने मन की प्रेत-छायाओं से लड़ते रहे और अंततः जब लड़ने से थक गए तो अपने आस-पास की दुनिया को छोड़कर एक सुबह चुपचाप कहीं चले गए.
स्वदेश दीपक की ‘मैंने मांडू नहीं देखा’ पढ़ने के बाद सहसा यह विश्वास नहीं होता कि सात साल (1991-1997) तक दुनिया से नहीं बल्कि स्वयं से भी आत्मनिर्वासित व्यक्तित्व इस प्रकार की रचना लिख सकता है. एक लेखक के रूप में अपनी खोई हुई शक्तियों को प्राप्त करने की प्रक्रिया और उस प्रक्रिया की सुखद परिणति -यह किताब- सर्जक व्यक्तित्व की वापसी का विरल उदाहरण है. ‘The only way I keep afloat is by working. Directly, I stop working, I feel that I am sinking down, down. And as usual I feel that if I sink further, I shall reach the truth.’ ‘मैं सात वर्ष तक एक मनोरोग से ग्रस्त रहा. इस रोग से जुड़ी लोगों की कल्पनाएं डरावनी और प्रतिक्रियाएं हिंसक, नफ़रत भरी होती हैं. परिचित और पराए दोनों डंक मारते हैं, हौसला नहीं देते. समाज में विक्षिप्त आदमी लांछन बन जाता है.’ ‘जून 2006 में मां ने फोन किया, ‘स्वदेश कल घूमने बाहर गए और अभी तक वापस नहीं आए हैं’. हमने एक और दिन इंतज़ार करने का फैसला किया. वह नहीं लौटे. कोई चिठ्ठी नहीं थी. उनकी घड़ी, बटुआ और टॉर्च का जोड़ा, जो वह हमेशा अपने पास रखते थे, उनके कमरे में था.’
स्वदेश दीपक (जन्म: 6 अगस्त 1942) ने वैसे तो ‘मायापोत’ और ‘नंबर 57 स्क्वाड्रन’ उपन्यास और ‘अश्वारोही’ जैसे कहानी संग्रह भी लिखे हैं, पर मुख्यतया हिन्दी साहित्य में वह अपने नाटकों के लिए जाने जाते हैं, जिनमें यथार्थ को देखने के लिए एक अलग नज़रिया, एक अलग ट्रीटमेंट उपयोग में लाया गया है. 1
980 के अंतिम वर्षों में स्वदेश के नाटकों ने हिन्दी के बेजान पड़ गए रंगमंच को एक नई ऊर्जा से आप्लावित किया. नाटक ‘कोर्ट मार्शल’ (1991) आधुनिक हिन्दी रंगमंच की दृष्टि से स्वदेश की सफलतम रचना है, जिसके हजारों प्रदर्शन देश-विदेश में हुए. सैन्य न्याय-व्यवस्था और भारतीय मानस में गहरे धंसे जातीय भेदभाव पर आधारित यह नाटक स्वदेश के ही नहीं बल्कि 20वीं शताब्दी के बेहतरीन नाटकों में भी एक है.
इसके अलावा ‘जलता हुआ रथ, काल कोठरी , सबसे उदास कविता’ स्वदेश की प्रमुख नाट्यकृतियां हैं. नाट्य विधा और रंगमंच में अपने अमूल्य योगदान के लिए वर्ष 2004 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

महाराष्ट्र के एक स्वयंभू ‘धर्मगुरु’ अशोक खरात को पुलिस ने नासिक से गिरफ़्तार किया है. उन पर एक 35 वर्षीय महिला के साथ तीन साल तक बार-बार रेप करने और आपत्तिजनक वीडियो बनाने का आरोप है. हाल ही में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष द्वारा उनके पैर धोने का वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद उनका विरोध तेज़ हो गया था.

एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट का प्रतिनिधित्व करने वाले फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (एफआईए) ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय से उड़ानों में कम से कम 60% सीटों के चयन के लिए कोई शुल्क न लेने के फैसले को वापस लेने का आग्रह किया है. समूह का कहना है कि इस कदम से एयलाइंस को हवाई किराए बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ेगा.

आरजी कर अस्पताल में बलात्कार और हत्या की शिकार जूनियर डॉक्टर की मां ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने भाजपा के उम्मीदवार के रूप में पनिहाटी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने पर सहमति दे दी है. प्रदेश भाजपा की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. हालांकि भाजपा ने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की है, जिसमें इस सीट पर कोई प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया है.

केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि देशभर में 2017 से अब तक सीवर और सेप्टिक टैंक की ख़तरनाक सफाई के दौरान 622 सफाईकर्मियों की मौत हो चुकी है. 539 परिवारों को पूरा मुआवज़ा दिया गया, जबकि 25 परिवारों को आंशिक मुआवज़ा मिला. मौतों के मामले में उत्तर प्रदेश 86 के साथ सबसे ऊपर है, इसके बाद महाराष्ट्र (82), तमिलनाडु (77), हरियाणा (76), गुजरात (73) और दिल्ली (62) का स्थान है.

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कोटद्वार के ‘मोहम्मद’ दीपक की याचिका पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि एक 'संदिग्ध आरोपी' होने के नाते वह अपनी मनचाही राहत, जैसे सुरक्षा और पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ विभागीय जांच की मांग नहीं कर सकते. दीपक ने बीते महीने कोटद्वार में एक मुस्लिम बुज़ुर्ग के साथ दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा की जा रही बदसलूकी का विरोध किया था.

यह त्रासदी नवंबर 2014 में बिलासपुर ज़िले के नेमिचंद जैन अस्पताल (सकरी), गौरेला, पेंड्रा और मरवाही में आयोजित सरकारी सामूहिक नसबंदी शिविरों के दौरान हुई थी. ज़िला अदालत ने आरोपी सर्जन को ग़ैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और दो साल की क़ैद, 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया.

वी-डेम की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक दुनिया में 92 तानाशाही वाले देश और 87 लोकतांत्रिक देश मौजूद थे. भारत अभी भी 'चुनावी तानाशाह' बना हुआ है, इस श्रेणी में वह 2017 में शामिल हुआ था. 179 देशों में सें भारत लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में 105वें स्थान पर है. पिछले वर्ष यह 100वें स्थान पर था.

बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

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