
स्मोकिंग करने वालों के लिए कितना खतरनाक है कोविड-19 का संक्रमण, जानिए क्या कहते हैं रिसर्च के नतीजे
Zee News
डॉक्टर कहते हैं, “धूम्रपान करने वाल लोगों में कोरोना संक्रमण के साथ-साथ दीगर लाहक बीमारियों की चपेट में आने की संभावना काफी बढ़ जाती है, क्योंकि कोरोना वायरस फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है जबकि धूम्रपान फेफड़ों को कमजोर बनाता है.”
नई दिल्ली. स्मोकिंग करने वालों को कोरोना वायरस असर करता है या नहीं, और करता है तो कितना, यह सवाल कई लोगों के जेहन में घूम रहा है. धुम्रपान करने वाले कई लोग इस मुगालते में भी हैं कि सिगरेट पीने से कोरोना वायरस मर जाता है और इस तरह सिगरेट को वह कोरोना से बचाव के एक तरीके के तौर पर भी देखते हैं. दूसरी जानिब वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन का कहना है कि स्मोकिंग कर अपने फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों में कोविड की गंभीरता और इससे मौत का खतरा 50 फीसदी ज्यादा होता है बनिस्बत उन लोगों के जो स्मोकिंग नहीं करते हैं. डब्ल्यूएचओ की मानें तो तंबाकू का धुआं सांस की नली और फेफड़ों में कोरोना वायरस के एसीईट रिसेप्टर्स की तादाद को बढ़ा देता है, जिससे कोरोना संक्रमण की चपेट में आने का खतरा बढ़ जाता है. सिगरेटनोशी करने वाले लोग अगर कोरोना वायरस से संक्रमित हो जाते हैं, तो उनके लिए वेंटिलेटर पर पहुंचने और मौत का जोखिम काफी बढ़ जाता है.More Related News
