
स्कॉच व्हिस्की पीने वालों की बल्ले-बल्ले, FTA से ये चीजें होंगी सस्ती, जानिए कितना बड़ा हो जाएगा व्यापार
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इस डील से ब्रिटेन से भारत आने वाली स्कॉच व्हिस्की कंपनियों को बड़ा मार्केट मिल जाएगा, क्योंकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा व्हिस्की कंजम्पशन मार्केट है. हालांकि स्कॉच व्हिस्की की हिस्सेदारी अभी कम है, लेकिन FTA डील के बाद इसके रेट सस्ते होते ही इसकी बिक्री और बढ़ जाएगी.
भारत-यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हो चुकी है. दोनों देशों ने मुक्त व्यापार समझौते पत्र (FTA) पर साइन किया है, जिसका मतलब है कि भारत से यूनाइटेड किंगडम (UK) जाने वाली चीजों पर टैक्स खत्म हो जाएगा. वहीं दूसरी ओर, UK से भारत आने वाली चीजों पर टैक्स कम या फिर '0' कर दिया जाएगा. आम लोगों के लिए बड़ी राहत की बात ये होगी कि UK से भारत आने वाली चीजें सस्ती हो जाएंगी. खासकर कपड़े- जूते, चमड़े के प्रोडक्ट्स समेत स्कॉच व्हिस्की के रेट पर इसका ज्यादा असर दिखाई देगा.
स्कॉच व्हिस्की (Scotch Whisky) भारत में पॉपुलर वाइन (Wine) में से एक है, जिसे आमतौर पर 'स्कॉच' भी कहा जाता है. यह एक माल्ट या अनाज से बनी व्हिस्की है, जो द ग्रेट ब्रिटेन यानी यूनाइटेड किंगडम (UK) के स्कॉटलैंड में बनाई जाती हैं. स्कॉच व्हिस्की कई तरह की होती हैं, जिसमें सिंगल माल्ट स्कॉच, सिंगल ग्रेन स्कॉच, ब्लेंडेड स्कॉच, ब्लेंडेड ग्रेन और ब्लेंडेड माल्ट वगैरह हैं. ये अलग-अलग ब्रांड नेम से मार्केट में बिकती हैं. नीचे दिए गए ग्रॉफिक से समझें कौन-कौन सी वाइन, जो भारत इम्पोर्ट (Import) होती हैं और इस डील के बाद सस्ती हो सकती हैं...
ये वाइन हो जाएंगी सस्ती
भारत में UK व्हिस्की को मिलेगा बड़ा मार्केट इस डील से ब्रिटेन से भारत आने वाली स्कॉच व्हिस्की कंपनियों को बड़ा मार्केट मिल जाएगा, क्योंकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा व्हिस्की कंजम्पशन मार्केट है. हालांकि स्कॉच व्हिस्की की हिस्सेदारी अभी कम है. लेकिन FTA डील के बाद इसके रेट सस्ते होते ही इसकी बिक्री और बढ़ जाएगी.
2024 में भारत में व्हिस्की का मार्केट 30 अरब डॉलर था, लेकिन स्कॉच की हिस्सेदारी सिर्फ 2 से 3 फीसदी थी, लेकिन अब इस डील से इसकी हिस्सेदारी 5 से 7 फीसदी तक होने का अनुमान है. प्रीमियम सेगमेंट में ब्रिटिश कंपनियां जैसे- डियाजियो (जॉनी वॉकर, तालिस्कर) और पर्नोड रिकार्ड (चिवास रीगल) भारत में अपनी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ा सकती हैं.

लघु बचत योजनाओं (small savings schemes) में निवेश करने वालों को सरकार ने नए साल से पहले राहत या झटका, दोनों में से कुछ भी नहीं दिया है. पीपीएफ, एनएससी, सुकन्या समृद्धि योजना समेत सभी स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की ब्याज दरें लगातार सातवीं तिमाही के लिए जस की तस रखी गई हैं. 1 जनवरी 2026 से लागू नई दरों में कोई बदलाव नहीं होगा.
