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सावधान! अब गूगल Gemini का इस्तेमाल कर आपको लूट रहे हैं स्कैमर्स, सामने आया दुनिया का पहला खतरनाक AI मैलवेयर
Zee News
PromptSpy Malware: दुनिया का पहला एआई मैलवेयर 'PromptSpy' सामने आ गया है. यह वायरस आपके फोन की स्क्रीन का डेटा चोरी कर Google Gemini की मदद से फोन कंट्रोल करता है. ESET के रिसर्चर्स ने 'PromptSpy' नाम के इस खतरनाक एंड्रॉयड मैलवेयर का पता लगाया है. इससे बचने के लिए फोन में 'गूगल प्ले प्रोटेक्ट' ऑन रखें और अनजान ऐप्स से दूर रहें.
PromptSpy Malware: आज के समय में टेक्नोलॉजी जितनी तेजी से एडवांस हो रही है. उतनी ही तेजी के साथ स्कैमर्स का लोगों के साथ फ्रॉड करने का तरीका भी हाईटेक होते जा रहा है. अब तक आपने गूगल जेमिनी (Google Gemini) का इस्तेमाल ऑफिस के काम या होमवर्क के लिए लोगों को करते देखा या सुना होगा. लेकिन अब साइबर क्रिमिनल भी इसका इस्तेमाल आपके स्मार्टफोन को कंट्रोल करने के लिए कर रहे हैं. एक रिसर्चर्स ने 'PromptSpy' नाम के एक ऐसे खतरनाक एंड्रॉयड मैलवेयर का पता लगाया है, जो दुनिया का पहला ऐसा वायरस है जो जेनेटिक एआई (Generative AI) की मदद से चोरी करता है.
क्या है यह PromptSpy और क्यों है इतना खतरनाक? अब आपके मन में उत्सुकता होगी की यह PromptSpy क्या है? तो मैं आपको बता दूं की यह एक बेहद एडवांस मैलवेयर हैं. आमतौर पर जो पुराने वायरस या मैलवेयर होते थे, वे पहले से सेट किए गए नियमों (Hard-coded instructions) पर काम करते थे. यानी उन्हें जो सिखाया गया, वो बस वही करते थे. लेकिन 'PromptSpy' बहुत शातिर है. यह आपके फोन की स्क्रीन पर क्या चल रहा है, उसे समझता है और फिर गूगल के एआई 'जेमिनी' से सहायता मांगता है कि आगे क्या करना है? एंटीवायरस कंपनी ESET के रिसर्चर्स के अनुसार, यह मैलवेयर स्क्रीन की पूरी जानकारी XML फॉर्मेट में जेमिनी को भेजता है. इसके बाद जेमिनी उसे निर्देश देता है कि किसी ऐप को कैसे लॉक करना है या यूजर की नजरों से कैसे बचना है. सरल शब्दों में कहें तो, यह वायरस खुद फैसला नहीं लेता, बल्कि गूगल के एआई से ट्यूशन लेकर आपके साथ फ्रॉड करता है.
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कैसे बनाता है लोगों को अपना शिकार? यह मैलवेयर सबसे पहले आपके फोन की स्क्रीन का डेटा इकट्ठा करता है. इसमें आपके ऐप, टेक्स्ट और बटन की लोकेशन शामिल होती है. इसके बाद यह डेटा जेमिनी को भेजता है. जेमिनी इसे प्रोसेस करता है और JSON फॉर्मेट में जवाब देता है कि फोन में आगे क्या एक्शन लेना है? इसके बाद यह वायरस एंड्रॉयड की 'एक्सेसिबिलिटी सर्विस' का इस्तेमाल करके आपके फोन को कंट्रोल करना शुरू कर देता है. यह इतना स्मार्ट है कि अलग-अलग कंपनियों (जैसे Samsung, Xiaomi या Vivo) के फोन के हिसाब से अपनी चाल बदल लेता है.
कैसे बचें इस स्मार्ट साइबर ठगी से? अगर आप चाहते हैं कि आपका फोन और बैंक अकाउंट सिक्योर रहें तो आप नीचे दी गई बातों की गांठ बांध लें. 1. ऐसे साइबर फ्रॉड से बचने के लिए अगर आप एंड्रॉयड यूजर है, तो सबसे पहले अपने फोन में 'Google Play Protect' को हमेशा ऑन रखें. यह फीचर किसी भी सस्पिशियस ऐप को इंस्टॉल होने से पहले ही रोक देता है. 2. किसी भी अनजान लिंक पर click करने से बचें. कोई भी ऐप हमेशा'गूगल प्ले स्टोर' से ही इंस्टॉल करें. 3. जब भी कोई नया ऐप इंस्टॉल करें, तो देखें कि वह क्या-क्या परमिशन मांग रहा है. अगर कोई कैलकुलेटर ऐप आपकी गैलरी या कॉन्टैक्ट्स की परमिशन मांगे, तो समझ जाएं कि यह आपके लिए खतरा है. 4. अपने फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम और सिक्योरिटी पैच को हमेशा अपडेट रखें. कंपनियां अक्सर इन नए खतरों से बचने के लिए अपडेट जारी करती रहती हैं.
