
'वर्दी वाला गुंडा' लिखने वाले वेद प्रकाश शर्मा, जिन्होंने करोड़ों लोगों को पढ़ने का चस्का लगाया
Zee News
10 जून, 1955 में उत्तर प्रदेश के मेरठ में जन्में वेद प्रकाश शर्मा के उपन्यास 'वर्दी वाला गुंडा' की लगभग 8 करोड़ प्रतियां अब तक बिक चुकी हैं.
नई दिल्ली: हिंदी में इतना सबकुछ लिखे जाने के बाद भी आज भी ऐसा लिखने वालों का टोटा है, जिन्हें यह पता हो कि उनका पाठक वर्ग क्या पढ़ना चाहता है. आज भी जब साहित्य के नाम पर कई पन्ने एलीट वर्ग के लिए स्याह से रंग दिए जाते हैं और उसी वर्ग के लिए आयोजित हुई गोष्ठियों में प्रशंसा के लड्डू खाकर सब घर को निकल चलते हैं. इस चाल से अलग हटकर भी कुछ ऐसे लेखक थे, जो देश के करोड़ो लोगों के लिए लिख रहे थे और असल में पढ़े जा रहे थे. एलीट वर्ग ने ऐसे साहित्य को 'सस्ता साहित्य' और 'लुग्दी साहित्य' जैसे नामों से शुमार किया. लुग्दी के मायने खराब हो चुके कागज को फिर से रिसाइकिल करके उस पर उपन्यास की प्रतियां छापकर बेची गईं, तो इसे लुग्दी साहित्य कहा गया.More Related News
