
लाउडस्पीकर के साथ अजान से नींद में पड़ता है खलल: जानिए क्या कहता है कानून
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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 6 मई 2020 में मस्जिद से अजान मामले में एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा था कि लाउड स्पीकर से अजान देना इस्लाम का धार्मिक भाग नहीं है.
प्रयागराज: इलाहाबाद यूनिवर्सिटी (Allahabad University) की कुलपति डॉ. संगीता श्रीवास्तव ने सुबह होने वाली अजान को लेकर एतराज जताया है और कहा है कि लाउड स्पीकर द्वारा सुबह की अजान से उनकी नींद में खलल पड़ता है और पूरा दिन उनके सिर में दर्द रहता है. इस सिलसिले में उन्होंने प्रयागराज जिलाधिकारी भानु चंद्र गोस्वामी को खत लिखकर कार्रवाई की अपील की है. साथ ही, इसकी कॉपी कमिश्नर प्रयागराज, आईजी रेंज प्रयागराज केपी सिंह और एसएसपी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी को भी भेजी गई है. कुलपति के इस खत पर आईजी रेंज प्रयागराज केपी सिंह ने कहा मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. डॉ. संगीता ने अपने खत में 2020 की जनहित याचिका 570 का भी हवाला दिया है. उन्होंने कहा है कि जिलाधिकारी अगर कार्रवाई करते हैं तो लोगों को लाउडस्पीकर से होने वाली परेशानी से निजात मिलेगी.
Ice Breaker missile: भारतीय नौसेना अब अपने बेड़े को और भी ज्यादा खतरनाक बनाने के लिए एक ऐसे मिसाइल सिस्टम पर विचार कर रही है, जो समंदर के बीचों-बीच दुश्मन के होश उड़ा देगा. खबर आ रही है कि भारतीय नौसेना अपने MH-60R सीहॉक हेलीकॉप्टरों को इजरायल की आधुनिक 'आइस ब्रेकर' मिसाइल से लैस करने की योजना बना रही है. खास बात यह है कि भारतीय वायुसेना पहले ही इस मिसाइल को अपनी ताकत में शामिल करने की मंजूरी दे चुकी है.

Line Replaceable Units: RVAS ने भारत के स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. कंपनी अब तेजस Mk-2 के लिए एक महत्वपूर्ण Line Replaceable Unit के विकास में भागीदार बन गई है. तेजस Mk-2 को भारतीय वायुसेना के भविष्य के बेड़े की रीढ़ माना जा रहा है. तेजस Mk-2 एक मीडियम-वेट, सिंगल इंजन, मल्टी-रोल फाइटर जेट होगा. इसमें नया एयरफ्रेम, ज्यादा ताकतवर इंजन, आधुनिक एवियोनिक्स, स्वदेशी AESA रडार और ज्यादा हथियार ले जाने की क्षमता होगी.

Pakistani Leader Chief Guest in 1955 republic day: यह किस्सा है साल 1955 का. उस समय भारत ने पाकिस्तान के तत्कालीन गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था. उस दौर में भारत अपनी लोकतांत्रिक संस्थाओं और परंपराओं को आकार दे रहा था. मलिक गुलाम मोहम्मद का भारत से पुराना जुड़ाव भी रहा था. उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी.










