
'मुश्किल दौर में ये दिग्गज कंपनी...' अब बड़े बदलाव की तैयारी, 25000 नौकरियों पर संकट!
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इंटेल ने अप्रैल 2025 तक अपने कर्मचारियों की संख्या में लगभग 15% या लगभग 15,000 की कटौती कर दी है. यह कटौती पिछले साल 15,000 से ज्यादा नौकरियों में छंटनी के बाद हुई हैं.
चिप बनाने वाली कंपनी में 25000 नौकरियां खतरे में आ चुकी हैं. द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, चिप बनाने वाली कंपनी Intel 25000 से ज्यादा नौकरियों में कटौती करने की योजना बना रहा है, क्योंकि वह एक बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है. कंपनी का टारगेट 2025 के अंत तक अपने कर्मचारियों की संख्या करीब 75000 तक कम करना है, जो पिछले साल के अंत में 108,900 थी.
रिपोर्ट में कहा गया है कि नौकरियों में कटौती छंटनी और अन्य कार्रवाईयों के तहत की जाएंगी. इंटेल ने अप्रैल 2025 तक अपने कर्मचारियों की संख्या में लगभग 15% या लगभग 15,000 की कटौती कर दी है. यह कटौती पिछले साल 15,000 से ज्यादा नौकरियों में छंटनी के बाद हुई हैं.
इंटेल ने 2025 की दूसरी तिमाही के अपने रिजल्ट जारी करते हुए इस छंटनी की जानकारी दी है. कंपनी ने 2.9 अरब अमेरिकी डॉलर का नेट घाटा दर्ज किया है, जिसमें नवीनतम छंटनी से संबंधित कॉस्ट भी शामिल है. तिमाही के लिए रेवेन्यू 12.9 अरब अमेरिकी डॉलर पर स्थिर रहा, जो फिर भी बाजार की उम्मीदों से ज्यादा रहा.
इंटेल को आगे चालू तिमाही में राजस्व 12.6 अरब अमेरिकी डॉलर से 13.6 अरब अमेरिकी डॉलर के बीच रहने की उम्मीद है, जिसका सेंटर पॉइंट 13.1 अरब डॉलर होगा. यह सितंबर तिमाही के लिए 12.6 अरब अमेरिकी डॉलर के औसत अनुमान से ज्यादा है.
सीईओ ने माना मुश्किल दौर में कंपनी कर्मचारियों को लिखे एक पत्र में Intel के नए CEO लिप-बू टैन ने कंपनी के मुश्किल दौर को स्वीकार किया है. उन्होंने लिखा, 'मुझे पता है कि पिछले कुछ महीने आसान नहीं रहे हैं. हम संगठन को सुव्यवस्थित करने, बेहतर दक्षता लाने और कंपनी के हर स्तर पर जवाबदेही बढ़ाने के लिए कठोर और जरूरी फैसले ले रहे हैं.
सीईओ ने कहा कि कंपनी ने जर्मनी औ पोलैंड में नए कारखाने बनाने की योजना भी स्थगित कर दी है. वह अपने प्लांट में निर्माण की गति धीमी करेगी और कोस्टा रिका में कुछ परिचालन को वियतनाम और मलेशिया में ट्रांसफर करेगी. इंटेल ने कहा कि ये कदम उसकी परिचालन लागत को कम करने और उसके ग्लोबल परिचालन की क्षमता में सुधार लाने के प्रयास का हिस्सा है.

लघु बचत योजनाओं (small savings schemes) में निवेश करने वालों को सरकार ने नए साल से पहले राहत या झटका, दोनों में से कुछ भी नहीं दिया है. पीपीएफ, एनएससी, सुकन्या समृद्धि योजना समेत सभी स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की ब्याज दरें लगातार सातवीं तिमाही के लिए जस की तस रखी गई हैं. 1 जनवरी 2026 से लागू नई दरों में कोई बदलाव नहीं होगा.
