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भारत के 'काल भैरव' Drone ने विदेश में मारी बाजी, ARCA 2025 में मिला सिल्वर मेडल; अब इन देशों में मचाएगा कोहराम!
Zee News
Kaal Bhairav drone ARCA 2025: इस इवेंट में 'काल भैरव E2A2' ड्रोन ने ज़बरदस्त प्रदर्शन किया और सिल्वर मेडल हासिल किया. यह ड्रोन अपने एडवांस स्टील्थ डिजाइन और हाई-लेवल ऑटोनोमी के लिए जाना जाता है.
Kaal Bhairav drone Indian stealth UAV: भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के एक महत्वाकांक्षी ड्रोन प्रोजेक्ट 'काल भैरव E2A2' ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफ़लता हासिल की है. इस ड्रोन ने प्रतिष्ठित ARCA 2025 इवेंट में सिल्वर मेडल जीता है. 'फ्लाइंग वेजेज़' (Flying Wedges) नामक टीम ने इस ड्रोन को डिज़ाइन किया है. यह जीत न सिर्फ़ भारतीय ड्रोन टेक्नोलॉजी की उच्च क्षमता को दर्शाती है, बल्कि यह भविष्य में भारत से ड्रोन निर्यात (Drone Export) का रास्ता भी खोलती है.

Indian Air Force refuelling aircraft: भारत के पास अभी सिर्फ 6 पुराने Il-78MKI विमान हैं जो 2003-2004 में उज्बेकिस्तान से लिए गए थे. पुर्जों की कमी की वजह से इनमें से आधे से ज्यादा विमान अक्सर मरम्मत के लिए खड़े रहते हैं. पिछले साल भारत ने अमेरिका की एक कंपनी से एक टैंकर विमान लीज पर लिया था, लेकिन उसके साथ अमेरिकी क्रू आता है, जो युद्ध के समय भारत के काम नहीं आ सकेगा. ऐसे में ये नए विमान नई ताकत बनेंगे.

Tejas-MK2 Rollout: राफेल डील के बीच इंडियन एयरफोर्स के लिए बड़ी खुशखबरी है. HAL-DRDO ने कमाल का काम करते हुए तेजस मार्क-2 को उड़ान के लिए तैयार कर दिया है. इसका इंटरनल रोलआउट पूरा हो चुका है. अब स्वदेशी मिडियम वेट फाइटर जेट ट्रायल फेज में एंट्री कर गया है. इसके बाद कुछ मंजूरियों के बाद फाइनल रोलआउट होगा, जो सार्वजनिक तौर पर किया जाएगा.

Project Kusha Air Defence System: प्रोजेक्ट कुशा पूरी तरह 'मेड इन इंडिया' होगा, जिससे युद्ध के समय हमें किसी और देश के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा. साथ ही, रूस या अमेरिका जैसे देशों को अरबों डॉलर नहीं देने पड़ेंगे. वहीं, इसमें ऐसी तकनीकें जोड़ी जा रही हैं जो आने वाले दशकों तक दुश्मन के किसी भी नए विमान को मार गिराने में सक्षम होंगी.

Astra MK-1 Missile Upgrade: DRDO इस अपग्रेड में मिसाइल के प्रोपल्शन सिस्टम, फ्लाइट प्रोफाइल और एनर्जी मैनेजमेंट को बेहतर बनाएगा. इसके साथ ही गाइडेंस सिस्टम में भी सुधार किया जाएगा. लंबी दूरी तक मिसाइल की रफ्तार और maneuverability बनी रहे. यह अपग्रेड मिसाइल के मूल डिजाइन में बड़े बदलाव के बिना किया जाएगा.

Fateh Ghadir Class Submarines: ईरान लंबे समय से अमेरिका की नौसैनिक ताकत का मुकाबला असममित रणनीति के जरिए करता रहा है. पनडुब्बियों की तैनाती इसी रणनीति का हिस्सा है. जिसके तहत ईरान सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े नौसैनिक बलों पर दबाव बना सकता है. ईरानी नौसेना के मुताबिक उनकी पनडुब्बियां अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियों पर चेतावनी देने में सक्षम हैं.








