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भारत के इतिहास में राजाओं को कब देवतुल्य मानते थे लोग? इस 'स्वर्ण काल' में मिला भगवान का दर्जा
Zee News
इस काल को भारतीय इतिहास का 'स्वर्ण युग' कहा जाता है, जहां कला, विज्ञान, साहित्य और धर्म ने बहुत तरक्की की. इसी समय, राजाओं के इस दैवीय स्वरूप की परिकल्पना को और मजबूत किया गया, जिससे उनकी सत्ता को अधिक मान्यता और स्थिरता मिली.
Ancient indian kings: भारत का इतिहास जितना प्राचीन है, उतनी ही गहरी संस्कृति है. भारतीय संस्कृति व परंपरा से दुनिया वाकिफ है, जिसकी जड़ें हमारे इतिहास में निहित हैं. भारत में एक वक्त ऐसा भी था, जब राजा-रानियों को केवल इंसान ही नहीं, बल्कि भगवान के रूप में पूजा जाता था. आइए ऐसे ही एक काल से रूबरू होते हैं. जहां के बाशिंदों ने अपने राजा-रानी को देवतुल्य माना करते थे.
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