
भागवत पाठ Vs नफरत राग: RSS प्रमुख के बयान पर सियासत में बवाल, किसने उगला जहर?
Zee News
गाय के नाम पर मॉब लिंचिंग करने वालों को RSS प्रमुख मोहन भागवत ने हिंदुत्व विरोधी बताया. तो असदुद्दीन ओवैसी ने हिंदुत्व को नफरत की देन करार दे दिया. इसी कड़ी में मायावती ने भी कहा कि RSS के मुंह में राम बगल में छुरी. आपको इस रिपोर्ट में बताते हैं कि भागवत के बयान के बाद किसने किसने जहर उगला?
नई दिल्ली: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने सभी भारतीयों का डीएनए एक जैसा बताया तो भड़काऊ भाईजान तिलमिला गए हैं. दरअसल, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच द्वारा आयोजित कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि सभी भारतीयों का DNA एक है, चाहे वे किसी भी धर्म या जाति के हो. इसी के बाद सियासत में घमासान छिड़ गया. ओवैसी ने भागवत पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया- "RSS के भागवत ने कहा 'लिंचिंग करने वाले हिंदुत्व विरोधी' इन अपराधियों को गाय और भैंस में फर्क नहीं पता होगा, लेकिन कत्ल करने के लिए जुनैद, अखलाक, पहलू, रकबर, अलीमुद्दीन के नाम ही काफी थे. ये नफरत हिंदुत्व की देन है, इन मुजरिमों को हिंदुत्ववादी सरकार का समर्थन हासिल है. कायरता, हिंसा और क़त्ल करना गोडसे की हिंदुत्व वाली सोच का अटूट हिस्सा है."
Army Parade Autonomous Utility Logistics Vehicle: यह वाहन एक कॉम्पैक्ट, लो-प्रोफाइल और ट्रैक्ड रोबोटिक प्लेटफॉर्म है. जिसे बेहद मुश्किल और खतरनाक इलाकों में काम करने के लिए तैयार किया गया है. ड्रोन, आर्टिलरी और प्रिसिजन हथियारों के बढ़ते खतरे को देखते हुए, यह वाहन उन इलाकों में सप्लाई पहुंचाने के लिए बनाया गया है. जहां सैनिकों के साथ जाने वाले काफिले जोखिम में होते हैं.

Naval propulsion system India: भारत की दिग्गज कंपनी Bharat Forge अब जमीन और आसमान के बाद समंदर की लहरों पर राज करने की तैयारी में है. कंपनी के चेयरमैन Baba Kalyani ने एक बहुत बड़ा ऐलान किया है, जिससे भारतीय नौसेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी. अब देश के युद्धपोतों को चलाने के लिए विदेशी इंजनों या उनके पुर्जों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, क्योंकि भारत ने अपना खुद का 'नेवल प्रोपल्शन सिस्टम' यानी जहाज को चलाने वाली मशीनरी बनाना शुरू कर दिया है.

Indian anti drone system: सरहदों पर और संवेदनशील इलाकों में दुश्मन के ड्रोन अब मनमानी नहीं कर पाएंगे. भारतीय रक्षा क्षेत्र की एक और कंपनी ने एक ऐसा 'शिकारी' तैयार किया है, जो आसमान में उड़ते हुए ड्रोन को ढूंढकर उसे वहीं खत्म कर देगा. यह कोई साधारण बंदूक नहीं, बल्कि एक गाइडेड मिसाइल सिस्टम है जिसे छोटे ड्रोन को मारने के लिए ही बनाया गया है.

Rafale Deliveries: भारत में बनने वाला प्लांट सिर्फ भारतीय वायुसेना के लिए नहीं होगा. Dassault की योजना इसे एक ग्लोबल एक्सपोर्ट हब के तौर पर विकसित करने की है. जहां से दुनिया के दूसरे देशों को भी राफेल सप्लाई किए जा सकें. यह भारत को वैश्विक एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की सोच से भी मेल खाती है.

Indian Navy Shipyards: रक्षा मंत्रालय (MoD) ने मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL), गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) और हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) जैसे सरकारी शिपयार्ड्स को खास निर्देश दिए हैं. इन निर्देशों के तहत डॉकिंग और निर्माण क्षमता बढ़ाई जाएगी. ताकि भारत में बने युद्धपोतों का निर्यात आसान और तेज हो सके.

India Russia SU-57 Deal: भारत क्या रूस से SU-57 खरीदेगा. रूस ने एक बाद एक ऑफर भारत के सामने पेश किया है. रोस्टेक कंपनी के सीईओ ने सीईओ ने भारत जिस राफेल डील के पीछे जा रहा है, हम उतने ही पैसे में 5वीं पीढ़ी के 230 फाइटर जेट देंगे. यानी दोगुने से भी ज्यादा फाइटर जेट भारत को मिलेंगे. वर्तमान में फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट को लेकर भारत से फ्रांस की बातचीत चल रही है.

Indian Navy S5 Class SSBN Construction: चीन और पाकिस्तान की बढ़ती नौसैनिक ताकत भारत के लिए एक बड़ी चुनौती मानी जाती है. इसी को ध्यान में रखते हुए S5 पनडुब्बियों को बेहद आधुनिक स्टेल्थ तकनीक से लैस किया जा रहा है. इनमें 190 मेगावॉट का प्रेसराइज्ड वाटर रिएक्टर होगा. इसे पूरी तरह स्वदेशी रूप से भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) ने विकसित किया है.

Indian Navy Kamikaze Drones for Maritime Strike: इन मैरीटाइम लॉइटरिंग म्यूनिशन की रेंज अधिक होगी. नौसेना के जहाज दुश्मन के तट और जहाजों पर काफी दूर से हमला कर सकेंगे. इससे दुश्मन के तटीय डिफेंस सिस्टम और एंटी-शिप हथियारों का खतरा कम होगा. इन ड्रोन को दोहरी भूमिका के लिए तैयार किया जा रहा है. जमीन पर मौजूद ठिकानों के साथ-साथ दुश्मन के युद्धपोतों पर भी हमला किया जा सकेगा.

Reliance Will buy oil from Venezuela: अमेरिका के 500 प्रतिशत टैरिफ के जवाब की तैयारी भारत कर रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले तो रूस से तेल खरीदना कम कर रहा है. इसके अलावा दूसरी तरफ भारतीय निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां वेनेजुएला से तेल खरीदने को तैयार हो गई हैं, यह वही तेल होगा, जिसपर अमेरिका का स्वामित्व होगा.




