
प्रकाश पर्व: उस गुरुद्वारे की कहानी जो नौवें सिख गुरु के बलिदान को बताता है
Zee News
आज 1 अप्रैल की तारीख ने अपने इतिहास में गुरुतेगबहादुर की यादगार संजोकर रखी है, जिनके प्रकाश पर्व प्राकट्य दिवस (जयंती) को आज 450 साल पूरे हो रहे हैं.
नई दिल्लीः सिख धर्म की पवित्र और पूजनीय पुस्तक दशम ग्रंथ में एक जगह लिखा है. तिलक जंञू राखा प्रभ ताका॥ कीनो बडो कलू महि साका॥ साधन हेति इती जिनि करी॥ सीसु दीया परु सी न उचरी॥ धरम हेत साका जिनि कीआ॥ सीसु दीआ परु सिररु न दीआ॥ (जिन्होंने धर्म के लिए शाका (बलिदान) किया, शीश दिया पर मुंह से सी भी नहीं निकला.) यह पवित्र पंक्तियां सिखों के दशम गुरु, गुरु गोविंद सिंह ने अपने पिता और नवम गुरु, गुरु तेगबहादुर के लिए लिखीं हैं.More Related News
