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तुर्की में तबाही लाएगा भारत का 'प्रलय'? एर्दोगन के कट्टर दुश्मन ने देखा 'दहशत' वाला ट्रेलर; अब डिफेंस डील की तैयारी
Zee News
India-Armenia defence deal: 'प्रलय' मिसाइल की मारक क्षमता 150 किलोमीटर से 500 किलोमीटर तक है. जो दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों पर सटीक और विनाशकारी हमला करने में सक्षम है. आर्मेनिया जैसे देशों के लिए यह हथियार उनकी रक्षा रणनीति में एक गेम चेंजर साबित हो सकता है.
Pralay missile India: तुर्की और आर्मेनिया के कड़वाहट भरे रिश्ते से दुनिया वाकिफ है. वहीं, ऑपरेशन सिंदूर के बाद तुर्की ने जिस तरह दुश्मन मुल्क को हथियार मुहैया कराया था. उसका आज न तो कल बदला लेना ही था. ऐसे में, भारत ने हाल में घातक प्रलय मिसाइल का परीक्षण किया है. इसकी रेंज व सटीकत ने न केवल इंडियन आर्मी को प्रभावित किया, बल्कि दुनिया भर की नजर अपनी ओर खींचा. ऐसे में तुर्की के कट्टर दुश्मन आर्मेनिया ने भी अपने खेमे में शामिल करने में दिलचस्पी दिखाई है.

Indian Air Force refuelling aircraft: भारत के पास अभी सिर्फ 6 पुराने Il-78MKI विमान हैं जो 2003-2004 में उज्बेकिस्तान से लिए गए थे. पुर्जों की कमी की वजह से इनमें से आधे से ज्यादा विमान अक्सर मरम्मत के लिए खड़े रहते हैं. पिछले साल भारत ने अमेरिका की एक कंपनी से एक टैंकर विमान लीज पर लिया था, लेकिन उसके साथ अमेरिकी क्रू आता है, जो युद्ध के समय भारत के काम नहीं आ सकेगा. ऐसे में ये नए विमान नई ताकत बनेंगे.

Tejas-MK2 Rollout: राफेल डील के बीच इंडियन एयरफोर्स के लिए बड़ी खुशखबरी है. HAL-DRDO ने कमाल का काम करते हुए तेजस मार्क-2 को उड़ान के लिए तैयार कर दिया है. इसका इंटरनल रोलआउट पूरा हो चुका है. अब स्वदेशी मिडियम वेट फाइटर जेट ट्रायल फेज में एंट्री कर गया है. इसके बाद कुछ मंजूरियों के बाद फाइनल रोलआउट होगा, जो सार्वजनिक तौर पर किया जाएगा.

Project Kusha Air Defence System: प्रोजेक्ट कुशा पूरी तरह 'मेड इन इंडिया' होगा, जिससे युद्ध के समय हमें किसी और देश के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा. साथ ही, रूस या अमेरिका जैसे देशों को अरबों डॉलर नहीं देने पड़ेंगे. वहीं, इसमें ऐसी तकनीकें जोड़ी जा रही हैं जो आने वाले दशकों तक दुश्मन के किसी भी नए विमान को मार गिराने में सक्षम होंगी.

Astra MK-1 Missile Upgrade: DRDO इस अपग्रेड में मिसाइल के प्रोपल्शन सिस्टम, फ्लाइट प्रोफाइल और एनर्जी मैनेजमेंट को बेहतर बनाएगा. इसके साथ ही गाइडेंस सिस्टम में भी सुधार किया जाएगा. लंबी दूरी तक मिसाइल की रफ्तार और maneuverability बनी रहे. यह अपग्रेड मिसाइल के मूल डिजाइन में बड़े बदलाव के बिना किया जाएगा.

Fateh Ghadir Class Submarines: ईरान लंबे समय से अमेरिका की नौसैनिक ताकत का मुकाबला असममित रणनीति के जरिए करता रहा है. पनडुब्बियों की तैनाती इसी रणनीति का हिस्सा है. जिसके तहत ईरान सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े नौसैनिक बलों पर दबाव बना सकता है. ईरानी नौसेना के मुताबिक उनकी पनडुब्बियां अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियों पर चेतावनी देने में सक्षम हैं.








