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टैरिफ पर ट्रंप की हार, भारत के दोनों हाथों में लड्डू, ट्रेड और तेल दोनों पर सीन बदलेगा, भारत का पलड़ा भारी
Zee News
India-US Trade Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिस टैरिफ को हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर अपनी मनमानी कर रहे थे. अब वही उनपर भारी पर गया है. अमेरिका की सर्वोच्च अदालत ने ट्रंप को सबसे बड़ा झटका देते हुए उनके हाथों से टैरिफ नाम का हंटर छीन लिया है.
US Court on Trump Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिस टैरिफ को हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर अपनी मनमानी कर रहे थे. अब वही उनपर भारी पर गया है. अमेरिका की सर्वोच्च अदालत ने ट्रंप को सबसे बड़ा झटका देते हुए उनके हाथों से टैरिफ नाम का हंटर छीन लिया है. जिस शक्ति का इस्तेमाल कर ट्रंप अपनी शर्तों पर ट्रेड डील करने के लिए दूसरे देशों पर दवाब बनाते थे. अब वो पावर उनसे छीन ली गई है. भारत भी ट्रंप के टैरिफ वॉर का शिकार बना. उसी दबाव में महीनों की मशक्कत के बाद भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील अपने अंतिम पड़ाव में पहुंचा था. लेकिन अब कोर्ट के फैसले के बाद फिर से नया ट्विस्ट आ गया है. हालांकि ये ट्विस्ट भारत के लिए फायदेमंद रहने वाला है.
भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर क्या होगा असर ?
अमेरिकी कोर्ट के फैसले का भारत और अमेरिका ट्रेड डील पर भी असर दिखेगा. भले ही ट्रंप दावा कर रहे हो कि डील पर कोई प्रभाव नहीं होगा, लेकिन अब स्थिति बदल गई है. टैरिफ पर कोर्ट के फैसले के बाद भारत का पलड़ा भारी हो गया है. भारत का नजरिया 'वेट एंड वॉच' की कंडीशन में रहने वाला है. केंद्र सरकार ने इशारा कर दिया है. कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने कहा वो अमेरिका में बदल रही स्थितियों पर नजरें बनाए हुए हैं. अब भारत और अमेरिका ने अंतरिम व्यापार समझौते (ITA) को लेकर चीफ निगोशिएटर्स की प्रस्तावित बैठक को भी फिलहाल टाल दिया है. 23-26 फरवरी के बीच वॉशिंगटन में होने वाली बैठक को स्थगित कर दिया है. ट्रेड डील की शर्तों के मुताबिक भारत पर 18 फीसदी टैरिफ लगेगा. लेकिन खुद ट्रंप ने ग्लोबल टैरिफ को 15 फीसदी कर दिया है. भारत कभी भी घाटे का सौदा नहीं करेगा यानी अब टैरिफ पर अमेरिकी कोर्ट के फैसले से बाद भारत-अमेरिका डील में भी बड़े बदलाव होंगे. जिसमें भारत का दबदबा दिखेगा.
टैरिफ पर कोर्ट के फैसले के बाद भारत का पलड़ा भारी
ट्रंप पीएम मोदी के साथ बेहतरीन केमिस्ट्री की बात करते हैं. लेकिन जब टैरिफ की बात आती है तो उनका रवैया बदल जाता है. भारत पर 25 फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ और 25 फीसदी टैरिफ रूस से तेल खरीदने की वजह से जुर्माने के तौर पर लगाया गया. बाद में भारत और अमेरिका के बीच तय हुई ट्रेड डील की शर्तों के तहत टैरिफ को 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया. लेकिन कोर्ट के फैसले के बाद सीन पूरा बदल गया है. चूंकि भारत और अमेरिका के बीच डील अभी साइन नहीं हुई है, सिर्फ फ्रेमवर्क तैयार हुआ है. ऐसे में अब भारत उस पोजिशन में है, जहां वो ट्रंप से निगोशिएशन कर सके. ट्रंप ने कोर्ट के फैसले से इतर जाते हुए जो 15 फीसदी का टैरिफ लगाया है ये फैसला ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122 के तहत है, इसकी टाइम लाइन 150 दिनों की है. यानी इसके बाद वो अवैध हो जाएगा. ट्रेड डील की शर्तों के हिसाब से भारत पर 18 फीसदी टैरिफ लगेगा. यानी अब भारत ट्रंप के सामने ट्रेड डील की शर्तों को रिफॉर्म करने की बात कर सकता है.
