
जिस विविधता पर ब्रिटेन को नाज़ है, उससे भारत को क्यों ऐतराज़ है
The Wire
ऋषि सुनक के ब्रिटेन का प्रधानमंत्री बनने पर भारतीयों को ख़ुश होने की जगह वास्तव में गंभीरता के साथ आत्ममंथन करना चाहिए कि हज़ारों सालों से हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा रही हमारी धार्मिक विविधता और सांस्कृतिक बहुलता का क्या हुआ.
1979 से 1986 तक मैं लंदन में रहा- किसी प्रवासी की तरह नहीं, बल्कि एक छात्र की तरह- लेकिन उस दौरान मैंने ब्रिटिश जीवन को इतना देख लिया था कि आज उसे छोड़ आने के 36 सालों बाद वह देश कितना आगे बढ़ा है, इसे ठीक से समझ पाता हूं. Thirty years ago today Paul Boateng, Keith Vaz, the late great Bernie Grant & myself elected to the British parliament #stillstanding pic.twitter.com/tEEZWD0MCN ‘ब्रिटेन ने एक ईसाई औपनिवेशिक साम्राज्य चलाया फिर भी आज वही ब्रिटेन सुनक को शीर्ष पद के लिए प्रतिस्पर्धा करने की इजाजत दे रहा है. ब्रिटेन के किसी विपक्षी नेता और यहां तक कि उनकी ही पार्टी के प्रधानमंत्री पद के दूसरे दावेदारों ने उनके धर्म को लेकर सवाल नहीं उठाया है. उनके धन को लेकर, हां. कामगार वर्ग के प्रति उनके रवैये को लकर, हां. और उनकी पत्नी द्वारा करचोरी को लेकर, हां. किसी लोकतंत्र के लिए ये सारे काफी अच्छे सवाल हैं. (यह अलग बात है कि भारत में ये सवाल शायद ही कभी पूछे जाते हैं)’
मेरी उम्र 14 साल थी, जब मेरे पिता लंदन में पोस्टेड थे और जब मैं न्यूयॉर्क गया, तब मेरी उम्र 21 साल थी. उन सात सालों में मैंने साउथ लंदन के वर्किंग क्लास इलाके के एक कॉम्प्रिहेंसिव स्कूल से अपना ओ और ए लेवल पूरा किया और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (एलएसई) में पढ़ने गया. इस पूरे दौरान मार्गेट थैचर इंग्लैंड की प्रधानमंत्री थीं. नेशनल फ्रंट और ब्रिटिश नेशनल पार्टी के फासीवादी गुंडों द्वारा नस्लवादी हिंसा की घटनाएं काफी आम थीं और पुलिस का नस्लवादी रवैया- खासकर काले समुदाय के युवाओं के प्रति- जिंदगी की एक हकीकत थी. — Diane Abbott MP (@HackneyAbbott) June 11, 2017
मैंने कभी किसी प्रकार की शारीरिक हिंसा का सामना नहीं किया न ही ज्यादा नस्लवादी फब्तियों का मुझे सामना करना पड़ा. स्कूल में मेरे पहले या दूसरे हफ्ते में लंच ब्रेक के दौरान फुटबॉल खेलते हुए मेरे पाले का एक ब्रिटिश बच्चा मुझ पर चिल्लाया, ‘पास द बॉल,स्टैन! (बॉल पास करो, स्टैन). खेल खत्म होने पर मैंने उससे कहा कि मेरा नाम स्टैन नहीं है. उसके जवाब पर मैं ठहाका लगाए बगैर नहीं रह पाया, उसने कहा था, ‘मेरा मतलब पाकिस्टैन के स्टैन से था.’ मुझे याद आता है, उसके जवाब में अपमान का ज़रा-सा भी भाव नहीं था- उसने ‘पाकि’ वाले हिस्से पर जोर नहीं दिया था. उसने और उसके दोस्तों ने मेरा नाम पूछा और कहा, अगर वे मुझे ‘सिड’ कहकर पुकारें, तो मुझे कोई ऐतराज तो नहीं!
उस दिन से मुझे कभी भी (उस गोरों से भरे) स्कूल में कोई दिक्कत नहीं हुई. लेकिन यह स्पष्ट था कि ब्रिटिश समाज को नस्लवाद से समस्या थी, जिसे जनसांख्यिकीय भय दिखाकर और ब्रिटेन के अप्रवासियों और उनके वंशजों की देशभक्ति/वफादारी पर लेकर निराधार सवाल उठाकर द्वारा (दक्षिणपंथी राजनीतिज्ञों द्वारा) ज्यादा ही तूल दिया गया था.

योगी आदित्यनाथ की पहचान भारत के सबसे ज़्यादा आबादी वाले राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर इस वजह से विशेष रही कि उन्होंने एक अभियान चलाकर नफ़रती भाषण और नफ़रती अपराधों के सभी आरोपियों को बरी कर दिया- और इस अभियान की शुरुआत मुख्यमंत्री ने ख़ुद से ही की. वे देश के सबसे ज़्यादा ध्रुवीकरण करने वाले, लेकिन साथ ही बेहद लोकप्रिय कट्टरपंथी हिंदुत्ववादी नेताओं में से एक हैं.

महाराष्ट्र के एक स्वयंभू ‘धर्मगुरु’ अशोक खरात को पुलिस ने नासिक से गिरफ़्तार किया है. उन पर एक 35 वर्षीय महिला के साथ तीन साल तक बार-बार रेप करने और आपत्तिजनक वीडियो बनाने का आरोप है. हाल ही में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष द्वारा उनके पैर धोने का वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद उनका विरोध तेज़ हो गया था.

एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट का प्रतिनिधित्व करने वाले फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (एफआईए) ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय से उड़ानों में कम से कम 60% सीटों के चयन के लिए कोई शुल्क न लेने के फैसले को वापस लेने का आग्रह किया है. समूह का कहना है कि इस कदम से एयलाइंस को हवाई किराए बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ेगा.

आरजी कर अस्पताल में बलात्कार और हत्या की शिकार जूनियर डॉक्टर की मां ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने भाजपा के उम्मीदवार के रूप में पनिहाटी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने पर सहमति दे दी है. प्रदेश भाजपा की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. हालांकि भाजपा ने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की है, जिसमें इस सीट पर कोई प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया है.

केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि देशभर में 2017 से अब तक सीवर और सेप्टिक टैंक की ख़तरनाक सफाई के दौरान 622 सफाईकर्मियों की मौत हो चुकी है. 539 परिवारों को पूरा मुआवज़ा दिया गया, जबकि 25 परिवारों को आंशिक मुआवज़ा मिला. मौतों के मामले में उत्तर प्रदेश 86 के साथ सबसे ऊपर है, इसके बाद महाराष्ट्र (82), तमिलनाडु (77), हरियाणा (76), गुजरात (73) और दिल्ली (62) का स्थान है.

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कोटद्वार के ‘मोहम्मद’ दीपक की याचिका पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि एक 'संदिग्ध आरोपी' होने के नाते वह अपनी मनचाही राहत, जैसे सुरक्षा और पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ विभागीय जांच की मांग नहीं कर सकते. दीपक ने बीते महीने कोटद्वार में एक मुस्लिम बुज़ुर्ग के साथ दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा की जा रही बदसलूकी का विरोध किया था.

यह त्रासदी नवंबर 2014 में बिलासपुर ज़िले के नेमिचंद जैन अस्पताल (सकरी), गौरेला, पेंड्रा और मरवाही में आयोजित सरकारी सामूहिक नसबंदी शिविरों के दौरान हुई थी. ज़िला अदालत ने आरोपी सर्जन को ग़ैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और दो साल की क़ैद, 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया.

वी-डेम की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक दुनिया में 92 तानाशाही वाले देश और 87 लोकतांत्रिक देश मौजूद थे. भारत अभी भी 'चुनावी तानाशाह' बना हुआ है, इस श्रेणी में वह 2017 में शामिल हुआ था. 179 देशों में सें भारत लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में 105वें स्थान पर है. पिछले वर्ष यह 100वें स्थान पर था.

बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

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