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जहांगीर की एक चूक… ब्रिटिश हुकूमत ने जमा लिए पांव, जानें भारत में कब हुआ अंग्रेजों का आगमन
Zee News
British rule in india: 16वीं सदी में अंग्रेज एक कंपनी के तहत आए. शुरुआती दौर में उन्होंने सूरत में अपनी फैक्ट्री खोली. फिर धीरे-धीरे भारत में अपनी सेना बना ली. इन्हीं सैनिकों के बलबूते अंग्रेजों ने कई युद्ध जीते. आइए भारत में ब्रिटिश शासन की शुरुआती दौर को आसान भाषा में जानते हैं.
How british came to india: भारत की मिट्टी में इतिहास की कई कहानियां बसी हैं, लेकिन अंग्रेजों का आगमन एक ऐसी गाथा है, जो व्यापार के बहाने शुरू हुई और 200 साल के उपनिवेश में बदल गई. यह कहानी मसालों की खोज से लेकर नाविकों की जंग और चालाक व्यापारियों से शुरू हुई और ईस्ट इंडिया कंपनी से होते हुए ब्रिटिश शासन में तब्दील हो गई. ये व्यापारी भारत में व्यापार के बहाने आए और धोखे से देश पर कब्जा जमा लिया. हालांकि, एक वक्त के बाद भारत के वीर क्रांतिकारियों और सिपाहियों के सामने अंग्रेज घूटने टेकने को मजबूर हुए, और देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ. ऐसे में आइए अंग्रेजों के भारत में कदम रखने की कहानी को समझते हैं, और जानते हैं किन युद्धों के बाद भारत की सत्ता अंग्रेजों के हाथ में आई और जहांगीर से क्या चूक हुई.

Indian Air Force refuelling aircraft: भारत के पास अभी सिर्फ 6 पुराने Il-78MKI विमान हैं जो 2003-2004 में उज्बेकिस्तान से लिए गए थे. पुर्जों की कमी की वजह से इनमें से आधे से ज्यादा विमान अक्सर मरम्मत के लिए खड़े रहते हैं. पिछले साल भारत ने अमेरिका की एक कंपनी से एक टैंकर विमान लीज पर लिया था, लेकिन उसके साथ अमेरिकी क्रू आता है, जो युद्ध के समय भारत के काम नहीं आ सकेगा. ऐसे में ये नए विमान नई ताकत बनेंगे.

Tejas-MK2 Rollout: राफेल डील के बीच इंडियन एयरफोर्स के लिए बड़ी खुशखबरी है. HAL-DRDO ने कमाल का काम करते हुए तेजस मार्क-2 को उड़ान के लिए तैयार कर दिया है. इसका इंटरनल रोलआउट पूरा हो चुका है. अब स्वदेशी मिडियम वेट फाइटर जेट ट्रायल फेज में एंट्री कर गया है. इसके बाद कुछ मंजूरियों के बाद फाइनल रोलआउट होगा, जो सार्वजनिक तौर पर किया जाएगा.

Project Kusha Air Defence System: प्रोजेक्ट कुशा पूरी तरह 'मेड इन इंडिया' होगा, जिससे युद्ध के समय हमें किसी और देश के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा. साथ ही, रूस या अमेरिका जैसे देशों को अरबों डॉलर नहीं देने पड़ेंगे. वहीं, इसमें ऐसी तकनीकें जोड़ी जा रही हैं जो आने वाले दशकों तक दुश्मन के किसी भी नए विमान को मार गिराने में सक्षम होंगी.

Astra MK-1 Missile Upgrade: DRDO इस अपग्रेड में मिसाइल के प्रोपल्शन सिस्टम, फ्लाइट प्रोफाइल और एनर्जी मैनेजमेंट को बेहतर बनाएगा. इसके साथ ही गाइडेंस सिस्टम में भी सुधार किया जाएगा. लंबी दूरी तक मिसाइल की रफ्तार और maneuverability बनी रहे. यह अपग्रेड मिसाइल के मूल डिजाइन में बड़े बदलाव के बिना किया जाएगा.

Fateh Ghadir Class Submarines: ईरान लंबे समय से अमेरिका की नौसैनिक ताकत का मुकाबला असममित रणनीति के जरिए करता रहा है. पनडुब्बियों की तैनाती इसी रणनीति का हिस्सा है. जिसके तहत ईरान सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े नौसैनिक बलों पर दबाव बना सकता है. ईरानी नौसेना के मुताबिक उनकी पनडुब्बियां अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियों पर चेतावनी देने में सक्षम हैं.








