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चीन की बादशाहत खत्म, भारत बनेगा Rare Earth मैग्नेट का नया किंग; ₹7,000 करोड़ के साथ पकड़ी तीन गुना रफ्तार
Zee News
India rare earth magnets: इस कार्यक्रम के तहत, सरकार उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन और पूंजीगत सब्सिडी के माध्यम से लगभग पांच प्रमुख कंपनियों का समर्थन करने की प्लानिंग बना रही है.
India rare earth magnets: भारत सरकार दुर्लभ पृथ्वी मैग्नेट यानी Rare Earth Magnets के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी योजना पर काम कर रही है. चीन पर अपनी निर्भरता को कम करने के लिए, भारत इस क्षेत्र में अपने प्रोत्साहन कार्यक्रम का आकार लगभग तीन गुना बढ़ाने जा रहा है. यह योजना अब ₹7,000 करोड़ यानी करीब $788 मिलियन से अधिक की हो सकती है, जो पहले के प्रस्ताव से काफी अधिक है. इन मैग्नेट का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में होता है.

Indian Air Force refuelling aircraft: भारत के पास अभी सिर्फ 6 पुराने Il-78MKI विमान हैं जो 2003-2004 में उज्बेकिस्तान से लिए गए थे. पुर्जों की कमी की वजह से इनमें से आधे से ज्यादा विमान अक्सर मरम्मत के लिए खड़े रहते हैं. पिछले साल भारत ने अमेरिका की एक कंपनी से एक टैंकर विमान लीज पर लिया था, लेकिन उसके साथ अमेरिकी क्रू आता है, जो युद्ध के समय भारत के काम नहीं आ सकेगा. ऐसे में ये नए विमान नई ताकत बनेंगे.

Tejas-MK2 Rollout: राफेल डील के बीच इंडियन एयरफोर्स के लिए बड़ी खुशखबरी है. HAL-DRDO ने कमाल का काम करते हुए तेजस मार्क-2 को उड़ान के लिए तैयार कर दिया है. इसका इंटरनल रोलआउट पूरा हो चुका है. अब स्वदेशी मिडियम वेट फाइटर जेट ट्रायल फेज में एंट्री कर गया है. इसके बाद कुछ मंजूरियों के बाद फाइनल रोलआउट होगा, जो सार्वजनिक तौर पर किया जाएगा.

Project Kusha Air Defence System: प्रोजेक्ट कुशा पूरी तरह 'मेड इन इंडिया' होगा, जिससे युद्ध के समय हमें किसी और देश के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा. साथ ही, रूस या अमेरिका जैसे देशों को अरबों डॉलर नहीं देने पड़ेंगे. वहीं, इसमें ऐसी तकनीकें जोड़ी जा रही हैं जो आने वाले दशकों तक दुश्मन के किसी भी नए विमान को मार गिराने में सक्षम होंगी.

Astra MK-1 Missile Upgrade: DRDO इस अपग्रेड में मिसाइल के प्रोपल्शन सिस्टम, फ्लाइट प्रोफाइल और एनर्जी मैनेजमेंट को बेहतर बनाएगा. इसके साथ ही गाइडेंस सिस्टम में भी सुधार किया जाएगा. लंबी दूरी तक मिसाइल की रफ्तार और maneuverability बनी रहे. यह अपग्रेड मिसाइल के मूल डिजाइन में बड़े बदलाव के बिना किया जाएगा.

Fateh Ghadir Class Submarines: ईरान लंबे समय से अमेरिका की नौसैनिक ताकत का मुकाबला असममित रणनीति के जरिए करता रहा है. पनडुब्बियों की तैनाती इसी रणनीति का हिस्सा है. जिसके तहत ईरान सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े नौसैनिक बलों पर दबाव बना सकता है. ईरानी नौसेना के मुताबिक उनकी पनडुब्बियां अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियों पर चेतावनी देने में सक्षम हैं.








