
कोरोना वायरस के डेल्टा स्वरूप के साथ हर्ड इम्युनिटी संभव नहीं, विशेषज्ञों ने किया आगाह
NDTV India
यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंगलिया में औषधि के प्रोफेसर और संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ पॉल हंटर ने भी इसका समर्थन किया है. उन्होंने कहा, ‘‘हर्ड इम्युनिटी की अवधारणा हासिल नहीं की जा सकती क्योंकि हम जानते हैं कि यह संक्रमण टीका न लगवाने वाले लोगों में फैलेगा और ताजा आंकड़ें यह दिखाते हैं कि टीकों की दो खुराक संक्रमण के खिलाफ संभवत: केवल 50 फीसदी सुरक्षा देती हैं.’’
ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड वैक्सीन (Oxford Vaccine) समूह के प्रमुख ने आगाह किया है कि कोविड-19 के अत्यधिक संक्रामक डेल्टा स्वरूप ने हर्ड इम्युनिटी (Herd immunity) की संभावना को कठिन बना दिया है. हर्ड इम्युनिटी का अर्थ किसी समाज या समूह के कुछ प्रतिशत लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास के माध्यम से किसी संक्रामक रोग के प्रसार को रोकना है. हर्ड इम्युनिटी की संभावना वहां होती है जहां किसी देश की ज्यादातर आबादी किसी वायरस से प्रतिरक्षा हासिल कर लेती है. प्रोफेसर एंड्रयू पोलार्ड ने मंगलवार को कोरोना वायरस पर सर्वदलीय संसदीय समूह (एपीपीजी) को बताया कि एक और अत्यधिक संक्रामक रोग का डर अब भी बना हुआ है और ऐसा कुछ नहीं है जो जानलेवा संक्रमण को फैलने से पूरी तरह रोक सके. हालांकि, साथ ही उन्होंने कहा कि ‘‘घबराने'' की कोई बात नहीं है. उन्होंने ब्रिटिश सरकार की कोविड-19 रोधी टीके की प्रस्तावित तीसरी बूस्टर खुराक पर शंका जतायी.More Related News

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