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कोरोना के बीच अंधविश्वास स्वीकार और  विज्ञान का तिरस्कार

कोरोना के बीच अंधविश्वास स्वीकार और विज्ञान का तिरस्कार

The Quint
Tuesday, May 25, 2021 08:58:50 AM UTC

Corona In India: 1 साल का समय मिला, लेकिन तैयारी नही की गई है. हजारों साल से पाखंडी समाज में तो बहुत बदलाव नहीं हो सकता. Got 1 year time, but no preparation has been done. There cannot be much change in a hypocritical society for thousands of years.

जब कोरोना वायरस फैला उसी समय से विज्ञान का तिरस्कार शुरू हो गया . दवा के रूप में गोमूत्र पार्टी का आयोजन किया गया. गोबर लेप के बाद स्नान करने से इलाज ढूढ़ा गया. विज्ञान बेचारा दूर से देखता रहा है कि कैसे वायरस का गला दबाए. अंत मे सफल हुआ और सबको शरण मे जाना पड़ा. समाज के कुछ अंधविश्वासी लोग इस महामारी में भी तर्क संगत नहीं दिख रहे हैं. उनके जीवन में समझदारी की जगह ढोंग, पाखंड और धर्मान्धता है. लोग महंगे मकान और किचन तोड़ने में लगे रहते हैं कि वास्तु के अनुसार नहीं बना.हरिद्वार कुंभ में मुख्यमंत्री का जब बयान ऐसा हो कि गंगा मैया के आशीर्वाद से कोरोना नहीं होगा तो लोग क्यों न प्रोत्साहित हों? जो नहाए उन्हें तो हुआ बल्कि पूरे देश मे फैल गया. हवन और धुंआ से कोरोना को भगाने का काम चल रहा है . भ्रम फैलाया जा रहा है कि यह 5जी और पूर्व जन्म के कर्मों का फल लोगों को मिल रहा है तो कहीं इसे दैवी प्रकोप बताया जा रहा है.एक साल का समय भी फिर भी तैयारी नहींलगातार विज्ञान की सत्यता को नकारा जा रहा था. गिलोय और कोरोनिल से इलाज बताया. कोई नींबू के रस से इलाज बताना शुरू कर दिया.आपदा में अवसर तलाश करके कोरोनील खोज लिया जिसको देश के स्वास्थ्य मंत्री ने अपनी उपस्थिति से वैद्यता दी. झूठ कह डाला कि विश्व स्वास्थ्य संगठन से प्रमाणिकता मिल चुकी है. हर कदम पर धर्मान्धता को बढ़ावा दिया गया.यह बड़ा कारण बना की 1 साल का समय मिला, लेकिन तैयारी नही की गई है. हजारों साल से पाखंडी समाज में तो बहुत बदलाव नहीं हो सकता, लेकिन सरकार तैयारी ना करे यह जरूर बहुत त्रासदी वाला था. भारत में सबसे ज्यादा ऑक्सीजन और वैक्सीन का उत्पादन हो और ऐसे में दोनों का अभाव होना भयंकर विफलता है. जो समाज तर्कसंगत और वैज्ञानिक सोच का है वहां की सरकारों पर अंकुश लगा.अमेरिका , ब्रिटेन जैसे देशों ने पिछले जून-जुलाई में भारी निवेश करके पर्याप्त टीका का प्रबंध कर लिया. 28 जनवरी 2021 को दावोस में हो रहे विश्व आर्थिक मंच पर प्रधानमंत्री जी ने एक तरह से कोरोना पर विजय की घोषणा कर दी. देश के स्वास्थ्य मंत्री ने मार्च में कह डाला कि अब तो कोरोना का खेल खत्म होने वाला है. संसदीय समिति ने नवंबर 2020 में ही चेतावनी दे दी थी और वैज्ञानिकों ने फरवरी मार्च में खतरे का आगाह किया था, लेकिन कोई संज्ञान नही लिया गया....
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