
एलर्जी के बावजूद डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को क्यों दिया गया था स्ट्रेप्टोमाइसिन का इंजेक्शन?
Zee News
आजादी के बाद के भारतीय इतिहास में यह किसी से छिपा नहीं है कि पहले पीएम रहे नेहरू के कई फैसले ऐसे रहे, जिनकी कीमत देश को सामाजिक मूल्यों की हानि पर चुकानी पड़ी. बंटवारे के साथ ही दंगों की शुरुआत हो चुकी थी और फिर इसके बाद सामने आया नेहरू-लियाकत पैक्ट. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इस पर नाराजगी जताई थी.
नई दिल्लीः Death Anniversary Dr. Shayama Prasad Mukharjee : 23 जून 2021 की सुबह आने वाली यह खबर बिल्कुल दिलचस्प है. मसला है कि कलकत्ता हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें मांग की गई है कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आज ही के दिन 1953 को हो गई रहस्यमय मौत की जांच की जाए और इसके लिए एक कमीशन गठित किया जाए. भारत के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो यहां ऐसी कई मौतें फाइलों में दर्ज मिलेंगी जो विडंबना बन कर रह गईं. 1945 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की कथित मृत्यु से शुरू हुआ सिलसिला आगे तक जारी रहा, जिसकी जद में पहले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी आए, फिर आए पं. लाल बहादुर शास्त्री और आगे चलकर पं. दीन दयाल उपाध्याय की मृत्यु भी इसी की कड़ी बनी.More Related News
