
आज होगा तालिबान सरकार का गठन, जानिए कौन हैं मुल्ला बरादर जो संभालेंगे देश की कमान
Zee News
अमेरिका की गुज़ारिश पर तीन साल से भी कम वक्त पहले पाकिस्तान की जेल से रिहा हुआ तालिबान नेता अब्दुल गनी बरादर अफगानिस्तान में 20 साल से चल रही जंग के गैर मुतनाजा फातेह के तौर पर उभरा है.
नई दिल्ली: तालिबान अफगानिस्तान में आज अपनी सरकार का गठन करने जा रहे हैं. हालांकि यह शुक्रवार को होने वाला था लेकिन इसे बाद में एक दिन के लिए टाल दिया गया था और यानी शनिवार को तालिबान के सह-संस्थापक मुल्ला बरादर (Mulla Biradar) के नेतृत्व में सरकार का गठन किया जाएगा. सरकार के गठन की सूचना देने वाले होर्डिंग शुक्रवार को पूरे काबुल में लगे थे. कौन है मुल्ला बरादर अमेरिका की गुज़ारिश पर तीन साल से भी कम वक्त पहले पाकिस्तान की जेल से रिहा हुआ तालिबान नेता अब्दुल गनी बरादर अफगानिस्तान में 20 साल से चल रही जंग के गैर मुतनाजा फातेह के तौर पर उभरा है. जबकि मजमूई तौर पर हैबतुल्लाह अखुंदजादा तालिबान का नेता है, बरादर इसका राजनीतिक प्रमुख और इसका सबसे बड़ा पब्लिक फेस है.
Ice Breaker missile: भारतीय नौसेना अब अपने बेड़े को और भी ज्यादा खतरनाक बनाने के लिए एक ऐसे मिसाइल सिस्टम पर विचार कर रही है, जो समंदर के बीचों-बीच दुश्मन के होश उड़ा देगा. खबर आ रही है कि भारतीय नौसेना अपने MH-60R सीहॉक हेलीकॉप्टरों को इजरायल की आधुनिक 'आइस ब्रेकर' मिसाइल से लैस करने की योजना बना रही है. खास बात यह है कि भारतीय वायुसेना पहले ही इस मिसाइल को अपनी ताकत में शामिल करने की मंजूरी दे चुकी है.

Line Replaceable Units: RVAS ने भारत के स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. कंपनी अब तेजस Mk-2 के लिए एक महत्वपूर्ण Line Replaceable Unit के विकास में भागीदार बन गई है. तेजस Mk-2 को भारतीय वायुसेना के भविष्य के बेड़े की रीढ़ माना जा रहा है. तेजस Mk-2 एक मीडियम-वेट, सिंगल इंजन, मल्टी-रोल फाइटर जेट होगा. इसमें नया एयरफ्रेम, ज्यादा ताकतवर इंजन, आधुनिक एवियोनिक्स, स्वदेशी AESA रडार और ज्यादा हथियार ले जाने की क्षमता होगी.

Pakistani Leader Chief Guest in 1955 republic day: यह किस्सा है साल 1955 का. उस समय भारत ने पाकिस्तान के तत्कालीन गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था. उस दौर में भारत अपनी लोकतांत्रिक संस्थाओं और परंपराओं को आकार दे रहा था. मलिक गुलाम मोहम्मद का भारत से पुराना जुड़ाव भी रहा था. उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी.










