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अमेरिका के 850 अरब डॉलर डिफेंस मार्केट में भारत की एंट्री! प्राइवेट कंपनियों की चांदी, होने जा रही मेगा डील
Zee News
India US defence agreement: भारत सरकार और रक्षा मंत्रालय अमेरिका के साथ एक खास 'रेसिप्रोकल डिफेंस एग्रीमेंट' करने की तैयारी में हैं. इस समझौते के बाद भारत की प्राइवेट रक्षा कंपनियों को अमेरिका के सरकारी रक्षा टेंडर्स में सीधे हिस्सा लेने का मौका मिलेगा. इससे भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट में कई गुना बढ़ोतरी होने की उम्मीद है.
India US defence agreement: भारत और अमेरिका के बीच एक ऐसा समझौता होने जा रहा है जो भारत की प्राइवेट कंपनियों के लिए तरक्की के सारे दरवाजे खोल देगा. अब तक हम अमेरिका से बड़े-बड़े हथियार खरीदते आए हैं, लेकिन अब वक्त बदल रहा है. जल्द ही ऐसा हो सकता है कि अमेरिकी सेना के विमानों और टैंकों में भारत की प्राइवेट कंपनियों के बने कलपुर्जे लगे हों. दरअसल, अभी तक की स्थिति यह है कि अमेरिका अपने रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा सिर्फ अपने देश की कंपनियों या बहुत खास सहयोगी देशों जैसे ब्रिटेन या ऑस्ट्रेलिया पर ही खर्च करता है. अमेरिका का रक्षा बजट करीब 850 अरब डॉलर का है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है. भारत इस बड़े बाजार का हिस्सा बनना चाहता है.

Indian Air Force refuelling aircraft: भारत के पास अभी सिर्फ 6 पुराने Il-78MKI विमान हैं जो 2003-2004 में उज्बेकिस्तान से लिए गए थे. पुर्जों की कमी की वजह से इनमें से आधे से ज्यादा विमान अक्सर मरम्मत के लिए खड़े रहते हैं. पिछले साल भारत ने अमेरिका की एक कंपनी से एक टैंकर विमान लीज पर लिया था, लेकिन उसके साथ अमेरिकी क्रू आता है, जो युद्ध के समय भारत के काम नहीं आ सकेगा. ऐसे में ये नए विमान नई ताकत बनेंगे.

Tejas-MK2 Rollout: राफेल डील के बीच इंडियन एयरफोर्स के लिए बड़ी खुशखबरी है. HAL-DRDO ने कमाल का काम करते हुए तेजस मार्क-2 को उड़ान के लिए तैयार कर दिया है. इसका इंटरनल रोलआउट पूरा हो चुका है. अब स्वदेशी मिडियम वेट फाइटर जेट ट्रायल फेज में एंट्री कर गया है. इसके बाद कुछ मंजूरियों के बाद फाइनल रोलआउट होगा, जो सार्वजनिक तौर पर किया जाएगा.

Project Kusha Air Defence System: प्रोजेक्ट कुशा पूरी तरह 'मेड इन इंडिया' होगा, जिससे युद्ध के समय हमें किसी और देश के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा. साथ ही, रूस या अमेरिका जैसे देशों को अरबों डॉलर नहीं देने पड़ेंगे. वहीं, इसमें ऐसी तकनीकें जोड़ी जा रही हैं जो आने वाले दशकों तक दुश्मन के किसी भी नए विमान को मार गिराने में सक्षम होंगी.

Astra MK-1 Missile Upgrade: DRDO इस अपग्रेड में मिसाइल के प्रोपल्शन सिस्टम, फ्लाइट प्रोफाइल और एनर्जी मैनेजमेंट को बेहतर बनाएगा. इसके साथ ही गाइडेंस सिस्टम में भी सुधार किया जाएगा. लंबी दूरी तक मिसाइल की रफ्तार और maneuverability बनी रहे. यह अपग्रेड मिसाइल के मूल डिजाइन में बड़े बदलाव के बिना किया जाएगा.

Fateh Ghadir Class Submarines: ईरान लंबे समय से अमेरिका की नौसैनिक ताकत का मुकाबला असममित रणनीति के जरिए करता रहा है. पनडुब्बियों की तैनाती इसी रणनीति का हिस्सा है. जिसके तहत ईरान सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े नौसैनिक बलों पर दबाव बना सकता है. ईरानी नौसेना के मुताबिक उनकी पनडुब्बियां अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियों पर चेतावनी देने में सक्षम हैं.








