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अमेरिका की टेंशन खत्म! रूस S-400 के चौथे स्क्वाड्रन सप्लाई करने को तैयार; इस तारीख तक होगी फाइनल डिलीवरी
Zee News
S-400 India deal: रूस द्वारा डिलीवरी जारी रखना बताता है कि उसने भारत को सबसे पहले अपने रक्षा उत्पाद देने को प्राथमिकता दी है, भले ही उसके घरेलू उत्पादन पर दबाव हो. आपको बता दें, S-400 के चौथे स्क्वाड्रन की 2026 में होने वाली डिलीवरी, भारत की हवाई सुरक्षा को तगड़ी ताकत देगी, जिससे देश की क्षेत्रीय सुरक्षा में मजबूती आएगी.
S-400 India deal: भारत को आयरन डोम व गोल्डन डोम जैसे डिफेंस ताकत देना वाले S-400 की ताकत से दुनिया वाकिफ है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की हर गुस्ताखी को हवा में ही नेस्तनाबूद करने वाले S-400 को लेकर एक बड़ी अपडेट सामने आई है. दरअसल, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसकी सफलता के बाद, भारत अपने डिफेंस खेमे में और भी S-400 शामिल करने पर विचार बनाया. वहीं, पहले से ही ऑर्डर, रूस ने भारत को S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम के चौथे स्क्वाड्रन की सप्लाई के लिए अपनी मजबूत कमिटमेंट दोहराई है.

Indian Air Force refuelling aircraft: भारत के पास अभी सिर्फ 6 पुराने Il-78MKI विमान हैं जो 2003-2004 में उज्बेकिस्तान से लिए गए थे. पुर्जों की कमी की वजह से इनमें से आधे से ज्यादा विमान अक्सर मरम्मत के लिए खड़े रहते हैं. पिछले साल भारत ने अमेरिका की एक कंपनी से एक टैंकर विमान लीज पर लिया था, लेकिन उसके साथ अमेरिकी क्रू आता है, जो युद्ध के समय भारत के काम नहीं आ सकेगा. ऐसे में ये नए विमान नई ताकत बनेंगे.

Tejas-MK2 Rollout: राफेल डील के बीच इंडियन एयरफोर्स के लिए बड़ी खुशखबरी है. HAL-DRDO ने कमाल का काम करते हुए तेजस मार्क-2 को उड़ान के लिए तैयार कर दिया है. इसका इंटरनल रोलआउट पूरा हो चुका है. अब स्वदेशी मिडियम वेट फाइटर जेट ट्रायल फेज में एंट्री कर गया है. इसके बाद कुछ मंजूरियों के बाद फाइनल रोलआउट होगा, जो सार्वजनिक तौर पर किया जाएगा.

Project Kusha Air Defence System: प्रोजेक्ट कुशा पूरी तरह 'मेड इन इंडिया' होगा, जिससे युद्ध के समय हमें किसी और देश के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा. साथ ही, रूस या अमेरिका जैसे देशों को अरबों डॉलर नहीं देने पड़ेंगे. वहीं, इसमें ऐसी तकनीकें जोड़ी जा रही हैं जो आने वाले दशकों तक दुश्मन के किसी भी नए विमान को मार गिराने में सक्षम होंगी.

Astra MK-1 Missile Upgrade: DRDO इस अपग्रेड में मिसाइल के प्रोपल्शन सिस्टम, फ्लाइट प्रोफाइल और एनर्जी मैनेजमेंट को बेहतर बनाएगा. इसके साथ ही गाइडेंस सिस्टम में भी सुधार किया जाएगा. लंबी दूरी तक मिसाइल की रफ्तार और maneuverability बनी रहे. यह अपग्रेड मिसाइल के मूल डिजाइन में बड़े बदलाव के बिना किया जाएगा.

Fateh Ghadir Class Submarines: ईरान लंबे समय से अमेरिका की नौसैनिक ताकत का मुकाबला असममित रणनीति के जरिए करता रहा है. पनडुब्बियों की तैनाती इसी रणनीति का हिस्सा है. जिसके तहत ईरान सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े नौसैनिक बलों पर दबाव बना सकता है. ईरानी नौसेना के मुताबिक उनकी पनडुब्बियां अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियों पर चेतावनी देने में सक्षम हैं.








