
अग्निपथ योजना: रक्षा ख़र्च घटाने के लिए सेना में चार साल के अनुबंध पर होगी भर्ती, विरोध में युवा
The Wire
केंद्र सरकार दशकों पुरानी रक्षा भर्ती प्रक्रिया में बदलाव करके 'अग्निपथ' योजना लेकर आई है, जिसके तहत युवाओं को चार साल के अनुबंध पर सेना में नौकरी पर रखा जाएगा. इसके विरोध में सेना भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं ने बिहार, यूपी और राजस्थान में विरोध प्रदर्शन किए हैं. पूर्व सैन्य अधिकारियों और विपक्ष ने भी योजना पर सवाल उठाए हैं.
Death knell for armed forces, ToD not tested, NO pilot project, straight implementation. Will also lead to Militarization of society, nearly 40,000(75%) youth year on year back rejected & dejected without a job, semi trained in arms ex Agniveers. Not a good idea. No one gains. https://t.co/tmt3qekeup #Watch बिहार में बक्सर के बाद मुजफ्फरपुर में सेना की #Agniveer स्कीम का विरोध शुरू हो गया है। युवाओं ने मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन के पास हंगामा किया। बड़ी संख्या में युवा हाथों में लाठी-डंडा लेकर बवाल कर रहे हैं। pic.twitter.com/rF5STJu1aK सरकार भी 5 सालों के लिए चुनी जाती है। फिर युवाओं को सिर्फ 4 साल देश की सेवा करने का मौका क्यों? #AgnipathRecruitmentScheme https://t.co/tvdeXdv3bl अग्निपथ योजना को लेकर युवाओं के मन में कई सारे सवाल और संशय हैं। इस योजना को लेकर आपकी क्या राय है मुझे बताएं। #AgnipathRecruitmentScheme pic.twitter.com/st9JAGMSyN भाजपा सरकार सेना भर्ती को अपनी प्रयोगशाला क्यों बना रही है? सैनिकों की लंबी नौकरी सरकार को बोझ लग रही है? When India faces threats on two fronts, the uncalled for Agnipath scheme reduces the operational effectiveness of our armed forces.
— Lt Gen Vinod Bhatia Retd (@Ptr6Vb) June 13, 2022 — Hindustan (@Live_Hindustan) June 15, 2022 — Varun Gandhi (@varungandhi80) June 15, 2022 — Varun Gandhi (@varungandhi80) June 15, 2022 युवा कह रहे हैं कि ये 4 साला नियम छलावा है। हमारे पूर्व सैनिक भी इससे असहमत हैं। The BJP govt must stop compromising the dignity, traditions, valour & discipline of our forces.
भाटिया ने कहा कि पेंशन खर्च बचाने के लिए लाई गई इस योजना से डिफेंस की ताकत कमजोर होगी. जिन जंगल, पहाड़ों और ऊंचे क्षेत्रों (हाई एल्टीट्यूड) में अभी हमारे जवान दुश्मनों को धूल चटाते हैं, वहां 4 साल के लिए तैनात होने वाले ये जवान कैसे काम कर पाएंगे? नए लड़कों के तकनीकी दक्ष होने की बात कही जा रही है, लेकिन इन जगहों पर तकनीक नहीं, बल्कि जज्बात और विशेषज्ञता की जरूरत होती है, जो पूरे समर्पण और उचित प्रशिक्षण से ही आते हैं. सेना भर्ती से जुड़े संवेदनशील मसले पर न कोई चर्चा, न कोई गंभीर सोच-विचार। बस मनमानी? pic.twitter.com/nNn83Cq0sq — Rahul Gandhi (@RahulGandhi) June 15, 2022
सेना भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं को भी यह डर सता रहा है कि चार साल बाद सेना से निकाले जाने के बाद वे क्या करेंगे? इसे लेकर देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन भी हुए हैं. — Priyanka Gandhi Vadra (@priyankagandhi) June 15, 2022

आरजी कर अस्पताल में बलात्कार और हत्या की शिकार जूनियर डॉक्टर की मां ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने भाजपा के उम्मीदवार के रूप में पनिहाटी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने पर सहमति दे दी है. प्रदेश भाजपा की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. हालांकि भाजपा ने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की है, जिसमें इस सीट पर कोई प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया है.

केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि देशभर में 2017 से अब तक सीवर और सेप्टिक टैंक की ख़तरनाक सफाई के दौरान 622 सफाईकर्मियों की मौत हो चुकी है. 539 परिवारों को पूरा मुआवज़ा दिया गया, जबकि 25 परिवारों को आंशिक मुआवज़ा मिला. मौतों के मामले में उत्तर प्रदेश 86 के साथ सबसे ऊपर है, इसके बाद महाराष्ट्र (82), तमिलनाडु (77), हरियाणा (76), गुजरात (73) और दिल्ली (62) का स्थान है.

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कोटद्वार के ‘मोहम्मद’ दीपक की याचिका पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि एक 'संदिग्ध आरोपी' होने के नाते वह अपनी मनचाही राहत, जैसे सुरक्षा और पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ विभागीय जांच की मांग नहीं कर सकते. दीपक ने बीते महीने कोटद्वार में एक मुस्लिम बुज़ुर्ग के साथ दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा की जा रही बदसलूकी का विरोध किया था.

यह त्रासदी नवंबर 2014 में बिलासपुर ज़िले के नेमिचंद जैन अस्पताल (सकरी), गौरेला, पेंड्रा और मरवाही में आयोजित सरकारी सामूहिक नसबंदी शिविरों के दौरान हुई थी. ज़िला अदालत ने आरोपी सर्जन को ग़ैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और दो साल की क़ैद, 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया.

वी-डेम की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक दुनिया में 92 तानाशाही वाले देश और 87 लोकतांत्रिक देश मौजूद थे. भारत अभी भी 'चुनावी तानाशाह' बना हुआ है, इस श्रेणी में वह 2017 में शामिल हुआ था. 179 देशों में सें भारत लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में 105वें स्थान पर है. पिछले वर्ष यह 100वें स्थान पर था.

बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच केंद्र सरकार भले ही एलपीजी की किल्लत से इनकार कर रही है लेकिन गैस एजेंसियों पर लंबी क़तारें हैं. गैस की किल्लत से जूझते लोगों के वीडियो सोशल मीडिया पर आ रहे हैं. वहीं, दिल्ली में कुछ अटल कैंटीन बंद हैं, कई हॉस्टल मेस और गुरुद्वारों में लंगर भी सिलेंडर की कमी प्रभावित हो रहे हैं.

मनरेगा के राज्य-स्तरीय तथ्य एक राजनीतिक रूप से असहज स्वरूप दिखाते हैं. यह कार्यक्रम उन इलाकों में सबसे सफल नहीं रहा जहां ज़रूरत सबसे ज़्यादा थी, बल्कि वहां बेहतर रहा जहां प्रशासनिक ढांचा मज़बूत और राजनीतिक इच्छाशक्ति स्पष्ट थी. केरल और ओडिशा के आंकड़े बताते हैं कि मनरेगा अधिकार से अधिक प्रशासनिक योजना बन गई है, ऐसे में वीबी-जी राम जी को क्या अलग करना होगा?



