अमेरिका, सऊदी अरब और चीन के इस ऐलान से बढ़ी भारत की मुश्किल
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अमेरिका, ब्रिटेन, सऊदी अरब और चीन ने नेट जीरो के लक्ष्य को हासिल करने के लिए डेडलाइन तय कर दी है. सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने हाल ही में घोषणा की है कि साल 2060 तक उनका देश कार्बन उत्सर्जन को लेकर नेट जीरो के टारगेट को हासिल कर लेगा. दुनिया में तीसरे सबसे बड़े कार्बन उत्सर्जक भारत पर भी नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन को लेकर दबाव बढ़ गया है.
चीन और अमेरिका के बाद दुनिया में ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन के मामले में भारत तीसरे नंबर पर है. अमेरिका, चीन, सऊदी अरब और ब्रिटेन समेत तमाम देश ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती कर नेट जीरो कार्बन एमिशन के लक्ष्य तक पहुंचने की समयसीमा का ऐलान कर चुके हैं, ऐसे में भारत पर भी ऐसा करने के लिए दबाव बढ़ रहा है.

वॉशिंगटन में शांति परिषद की पहली बैठक में गाजा पट्टी की वर्तमान स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहन चर्चा हुई. बैठक में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका को मजबूत करने पर जोर दिया गया और निर्णय लिया गया कि गाजा में शांति बनाए रखने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल तैनात किया जाएगा. इस बल में इंडोनेशिया, मोरक्को, कजाकिस्तान, कोसोवो और अल्बानिया जैसे पांच देश अपने सैनिक भेजेंगे. देखें वीडियो.

आज सबसे पहले आपको उस रिपोर्ट के बारे में बताएंगे, जिसके मुताबिक अमेरिका ने ईरान पर हमले की तारीख मुकर्रर कर दी है. और ये हमला इस हफ्ते के आखिर तक हो सकता है. ट्रंप ने ईरान को धमकी देते हुए कहा है कि ईरान नहीं माना तो हमला होगा. रमज़ान का महीना शुरू हो गया है और ये मुसलमानों के लिए पाक महीना माना जाता है. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर अमेरिका ने ईरान पर रमजान के महीने में हमला किया तो मुस्लिम देश क्या करेंगे?











